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Vinayak Chaturthi 2025: आज है विनायक चतुर्थी… इस विधि में करें गणेश पूजन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Vinayak Chaturthi Vrat May 2025 : वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी व्रत मनाया जाता है, जो भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष पर्व होता है। इस दिन श्रद्धालु विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा-अर्चना करके जीवन के कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार यह पावन तिथि गुरुवार, 1 मई 2025 को पड़ रही है, जो गुरु और गणपति दोनों के योग के कारण विशेष फलदायी मानी जा रही है। विनायक चतुर्थी का यह पर्व भक्तों के लिए एक विशेष अवसर है अपने जीवन से विघ्नों को दूर करने का। उचित विधि और श्रद्धा से किए गए पूजन से गणपति प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को सुबह 10:59 से 11:23 बजे के बीच पड़ने वाली विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा करना शुभ रहेगा।

पूजन मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त 04:14 से 04:57 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त 11:52 से 12:45 बजे तक
विजय मुहूर्त 14:31 से 15:24 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त 18:55 से 19:17 बजे तक
अमृत काल 06:16 से 07:44 बजे तक, दोपहर 03:36 बजे से 02 मई से शाम 05:07 बजे तक
रवि योग 05:40 से 14:21 बजे तक

इस दौरान गणपति जी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है, विशेषकर दोपहर के समय जब गणेश जी को ‘भोग लगाने’ का विशेष महत्व है।

जानें पूजा विधि

1. स्नान के बाद संकल्प लें – व्रत और पूजा का संकल्प लेकर मानसिक रूप से भगवान गणेश का ध्यान करें।
2. गणेश प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें – स्वच्छ स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री अर्पित करें – रोली, चावल, दूर्वा (21 गांठ), मोदक, फूल, सिंदूर, फल और पंचामृत चढ़ाएं।
4. गणेश मंत्रों का जाप करें – विधिपूर्वक मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजा करें।
5. आरती करें – गणपति की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

व्रत का महत्व

विनायक चतुर्थी व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायक माना गया है, जिनके कार्यों में बार-बार विघ्न उत्पन्न होते हैं। इस दिन विधिवत व्रत रखने और गणपति पूजन करने से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है।

विशेष योग: गुरु-गणपति संयोग

इस वर्ष यह चतुर्थी गुरुवार को पड़ी है, जिसे बृहस्पति वार कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुरुवार को गणेश पूजन विशेष फलदायी होता है क्योंकि बृहस्पति को ज्ञान का कारक माना गया है और गणपति बुद्धि के अधिपति हैं।

गणेश पूजन के मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

ॐ श्री गणेशाय नमः

इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति, बुद्धि की वृद्धि और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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