Last Updated: October 15, 2026

Dainik Savera Times Logo

Guru Purnima 2026: जुलाई में इस दिन मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा? जानें पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

July 12, 2026

Guru Purnima 2026: जुलाई में इस दिन मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा? जानें पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा को गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनके मार्गदर्शन के प्रति आभार प्रकट करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस तिथि का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

साल 2026 की गुरु पूर्णिमा को ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन प्रीति योग और हर्षण योग का संयोग बनने की मान्यता है।

Guru Purnima 2026
Guru Purnima 2026

गुरु पूर्णिमा 2026 कब मनाई जाएगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2026, शाम 6:18 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे

उदयातिथि के आधार पर 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का व्रत और पूजा-अर्चना की जाएगी।

गुरु का स्थान क्यों माना गया है सर्वोच्च?

सनातन परंपरा में गुरु को ज्ञान का स्रोत और जीवन का मार्गदर्शक माना गया है।

“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।”

गुरु के सर्वोच्च महत्व को दर्शाता है। इसका भावार्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय हैं और वे ही परम सत्य का मार्ग दिखाते हैं। इसी कारण गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का सम्मान करना, उनका आशीर्वाद लेना और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करना शुभ माना जाता है।

महर्षि वेदव्यास से जुड़ा है इस दिन का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के रचयिता और वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ था। उन्हें प्रथम गुरु के रूप में भी सम्मान दिया जाता है। इसी वजह से इस पर्व को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

ये भी पढ़ें…

गुरु पूर्णिमा पर स्नान और पूजा का महत्व

मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा भी प्रचलित है।

धार्मिक विश्वास है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का संचार होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें