Ganesh Visarjan 2026: गणेश उत्सव के दस दिनों के बाद आज गणपति बप्पा की विदाई की जाएगी। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद शुभ मुहूर्त में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। मान्यता है कि विदाई से पहले भगवान गणेश से अपनी मनोकामना कहने, पूजा के दौरान हुई भूलों के लिए क्षमा मांगने और अगले वर्ष फिर घर आने का आग्रह करने की परंपरा है।
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ दस दिवसीय गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी पर संपन्न होता है। इस दौरान भक्त अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की पूजा करते हैं। विसर्जन को बप्पा की विदाई का भावनात्मक अवसर माना जाता है, इसलिए इस समय विशेष प्रार्थना और मंत्र जाप किया जाता है।
किस कान में कहें अपनी बात?
धार्मिक मान्यताओं में गणपति के दाहिने कान में अपनी इच्छा कहने की परंपरा बताई जाती है। श्रद्धालु बप्पा के कान के पास जाकर धीमे स्वर में अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं। इस दौरान कई लोग अपने मुंह को हाथ से ढक लेते हैं, ताकि प्रार्थना निजी रूप से कही जा सके।
बप्पा के कान में क्या बोलें?
मन की इच्छा और प्रार्थना
विसर्जन से पहले श्रद्धालु अपने परिवार, करियर, स्वास्थ्य, सुख-शांति या अन्य व्यक्तिगत इच्छाओं के लिए गणपति से प्रार्थना कर सकते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस अवसर पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना का विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें
दस दिनों की पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई किसी कमी या त्रुटि के लिए गणपति से क्षमा मांगना भी विदाई की परंपरा का हिस्सा माना जाता है। आप बप्पा से सरल शब्दों में कह सकते हैं:-
“हे विघ्नहर्ता, आपकी सेवा और पूजा में हमसे जाने-अनजाने कोई भूल हुई हो तो हमें क्षमा करें और अपनी कृपा हमेशा बनाए रखें।”
अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दें
गणेश विसर्जन के दौरान भक्त गणपति को अगले वर्ष दोबारा अपने घर आने का निमंत्रण भी देते हैं। इसके लिए श्रद्धालु कह सकते हैं:-
“गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!”
इसका भावार्थ है- हे बप्पा, अगले वर्ष जल्दी आइए।
घर की सुख-शांति के लिए प्रार्थना
विदाई के समय परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना भी की जाती है। भक्त गणपति से प्रार्थना कर सकते हैं कि उनके परिवार पर सदैव आशीर्वाद बना रहे और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हों।
विसर्जन के समय कौन सा मंत्र बोलें?
गणेश प्रतिमा के विसर्जन के समय श्रद्धालु भगवान गणेश का स्मरण करते हुए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:-
“ॐ यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्।\
इष्टकामसमृद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥”
गणपति की विदाई के समय श्रद्धा, कृतज्ञता और भक्ति का भाव रखना इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य माना जाता है। विसर्जन से पहले बप्पा का आशीर्वाद लेकर उन्हें अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देते हुए भक्त भावपूर्ण विदाई देते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

