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राधा अष्टमी पर राधा रानी की पूजा करना फलदाई, महालक्ष्मी व्रत की होगी शुरुआत

Radha Ashtmi

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

19 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 3:27 बजे तक है। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन को मुख्य रूप से श्री राधा रानी और माता महालक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। उदयातिथि के अनुसार दो बड़े धार्मिक पर्व (राधा अष्टमी और महालक्ष्मी व्रत) पड़ रहे हैं।

राधा अष्टमी को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से राधा-कृष्ण की आराधना करने से जीवन में प्रेम, सुख और शांति आती है। वहीं, शनिवार से 16 दिवसीय महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत हो रही है, जो 3 अक्टूबर 2026 को संपन्न होगा। इस दिन कलश स्थापना और माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है।

 

शनिवार सुबह 6:18 बजे सूर्योदय और शाम 6:23 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 1:33 चंद्रोदय और रात 12:11 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेगा। शनिवार को दोपहर लगभग 2:29 बजे तक आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा, इसके बाद सौभाग्य योग शुरू हो जाएगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से दोपहर 12:44 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल शाम 6:23 से रात 8:24 बजे तक रहेगा।

वहीं, राहुकाल सुबह 10:50 बजे से 10:50 बजे और गुलिक काल सुबह 6:18 से 7:49 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 1:51 से 3:21 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है। शनिवार को इस दिन सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा। पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

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