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क्या औरत का अपना घर नहीं होता? ‘अनुपमा’ ने महिलाओं की पहचान और स्वतंत्रता पर की ज़रूरी बातचीत

Anupamaa

Anupamaa

एंटरटेनमेंट डेस्क : ‘अपना घर’ औरत के लिए सच में क्या मायने रखता है? औरत को अक्सर घर की धड़कन कहा जाता है वही जो अपने प्यार, देखभाल और अपनापन से एक मकान को घर बना देती है। लेकिन क्या वह घर सच में उसका होता है? क्या कोई ऐसी जगह है जिसे वह पूरी तरह अपना कह सके? स्टार प्लस का शो ‘अनुपमा’ बार बार उन मुद्दों पर बात करता है जो महिलाओं के दिल के बेहद करीब हैं। अब अपने नए ‘अपना घर’ ट्रैक के साथ यह शो पारिवारिक ड्रामे से आगे बढ़कर एक ऐसा सवाल उठाता है जो जितना भावनात्मक है उतना ही अहम: “हमारा अपना घर कौन सा है?”

यह ट्रैक उस पुरानी सोच को चुनौती देता है जिसमें औरतों से उम्मीद की जाती है कि वे सबके लिए घर बसाएँ, लेकिन उन्हें खुद अपना घर बनाने के लिए कभी मज़बूती से प्रोत्साहित नहीं किया जाता। ‘अनुपमा’ एक बार फिर मनोरंजन से कहीं आगे जाकर समाज में ज़रूरी बातचीत की शुरुआत करती है।

इस ट्रैक पर अपनी राय रखते हुए रूपाली गांगुली उर्फ अनुपमा ने ‘औरतों का अपना घर’ पर एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने कहा “सालों तक अनुपमा ने परिवारों को जोड़कर रखने में अपनी ज़िंदगी लगा दी, लेकिन इस बार वह वही सवाल पूछती है जो शायद लाखों औरतों ने कभी न कभी खुद से पूछा होगा, ‘हमारा अपना घर कौन सा है?’ मेरा मानना है कि हर औरत को वह आत्मविश्वास और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो एक ऐसे स्पेस से आती है जिसे वह सच में अपना कह सके। हर औरत को अपना घर खुद बनाना चाहिए।

अगर यह कहानी कुछ औरतों को अपने भविष्य, अपनी आर्थिक आज़ादी या अपने सपनों के बारे में अलग सोचने के लिए प्रेरित करती है, तो मुझे लगता है कि इसने मनोरंजन से कहीं आगे जाकर अपना मक़सद पूरा किया है। हम औरतों से हमेशा घर बसाने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन शायद अब समय आ गया है कि हम उन्हें अपना घर बनाने का हक भी उतनी ही मज़बूती से दें।”

देखिए ‘अनुपमा’ रात 10:00 बजे स्टार प्लस पर और जियोहॉटस्टार पर।

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