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भारतीय अभिनेत्रियाँ जिन्होंने अपने किरदारों को असली बनाने के लिए अपनाया डी- ग्लैम लुक

मुंबई: बॉलीवुड में जहां ग्लैमर को खास तवज्जो दी जाती है, कुछ अभिनेत्रियाँ ऐसी भी हैं जो असली और दमदार किरदार निभाने के लिए अपनी चमक-धमक छोड़ने से नहीं हिचकिचातीं। ये अभिनेत्रियाँ सिर्फ अभिनय नहीं करतीं, बल्कि कम मेकअप, साधारण कपड़े और सच्चाई से भरी अदाकारी से अपने किरदारों को जीवंत बना देती हैं।

सरबजीत में ऐश्वर्या राय बच्चन के भावनात्मक रूप से गहरे प्रदर्शन से लेकर द वॉकिंग ऑफ नेशन में निकिता दत्ता के दमदार किरदार तक, इन कलाकारों ने साबित किया है कि असली खूबसूरती कहानी कहने के अंदाज में छिपी होती है।

ऐश्वर्या राय बच्चन

दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में गिनी जाने वाली ऐश्वर्या राय बच्चन ने जब 2016 की फिल्म सरबजीत में दलबीर कौर का किरदार निभाया, तो दर्शक चौंक गए। उलझे बाल, झुर्रियों भरी त्वचा और दर्द से भरी आँखों के साथ, ऐश्वर्या ने उस महिला का रूप लिया, जिसने अपने भाई के इंसाफ के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। यह किरदार उनकी पिछली ग्लैमरस भूमिकाओं से बिल्कुल अलग था, जो उनकी गहरी अभिनय क्षमता को दर्शाता है।

आलिया भट्ट

फिल्म उड़ता पंजाब (2016) में आलिया भट्ट ने एक बिहारी प्रवासी लड़की का किरदार निभाया, जो नशे और मानव तस्करी की भयावह दुनिया में फँस जाती है। बिखरे बाल, साधारण कपड़े और किरदार में पूरी तरह ढल जाने वाली उनकी अदाकारी ने हर किसी को चौंका दिया। यह उनकी सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक थी, जिसने उन्हें जबरदस्त सराहना दिलाई।

निकिता दत्ता

नवोदित प्रतिभा निकिता दत्ता जल्द ही द वॉकिंग ऑफ नेशन में नज़र आएंगी, जहाँ वह स्वतंत्रता सेनानी पूनम सिंह औलख की भूमिका निभा रही हैं। बिना मेकअप वाले लुक और साधारण कपड़ों के साथ, उन्होंने अपने किरदार को असलियत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

अनुष्का शर्मा

फिल्म सुई धागा (2018) में अनुष्का शर्मा ने एक साधारण गृहिणी ममता का किरदार निभाया, जो अपने पति के सिलाई के सपने को पूरा करने में उसकी मदद करती है। सादे कपड़े, बंधे हुए बाल और बिना मेकअप के लुक में उन्होंने एक मध्यमवर्गीय महिला की असली परेशानियों को बखूबी दर्शाया।

तापसी पन्नू

हमेशा चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाने वाली तापसी पन्नू ने सांड की आँख (2019) में भारत की सबसे बुजुर्ग शार्पशूटर, प्रकाशी तोमर की भूमिका निभाई। प्रोस्थेटिक्स, झुर्रियों वाली त्वचा और ग्रामीण लहजे के साथ, उन्होंने अपने किरदार में जान डाल दी। यह उनके बेखौफ अभिनय का एक और शानदार नमूना था।

ये अभिनेत्रियाँ दिखाती हैं कि असली अभिनय सिर्फ खूबसूरती से नहीं, बल्कि किरदार की आत्मा में उतरने से आता है।

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