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‘गब्बर’ की फिल्मी दुनिया: हंसी और जिगरी दोस्ती का मिश्रण

November 11, 2025

‘गब्बर’ की फिल्मी दुनिया: हंसी और जिगरी दोस्ती का मिश्रण

मुंबई: हिंदी सिनेमा में अमजद खान का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में गब्बर सिंह की खौफनाक छवि उभर आती है। 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ में उनका यह किरदार इतना दमदार था कि उन्होंने तुरंत ही खुद को बॉलीवुड का सबसे यादगार विलेन साबित कर दिया। लेकिन अमजद खान केवल खलनायक ही नहीं थे। उन्होंने कॉमेडी और पॉजिटिव रोल भी निभाए, जिससे यह साबित हुआ कि उनका अभिनय केवल डर पैदा करने तक सीमित नहीं था।

अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ। उनके पिता जयंत भी अभिनेता थे, जिससे उन्हें बचपन से ही एक्टिंग काExposure मिला। 11 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘नाजनीन’ में बाल कलाकार के रूप में कदम रखा और 17 साल की उम्र में ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ में नजर आए। ये शुरुआती फिल्में उनके करियर की नींव बनीं।

जो डर गया, समझो मर गया : बॉलीवुड के 'गब्बर', कभी कमीडियन बन हंसाया तो कभी निभाई 'जिगरी दोस्ती'

‘शोले’ में गब्बर सिंह के बाद उन्होंने ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘सत्ते पे सत्ता’ और ‘शतरंज के खिलाड़ी’ जैसी फिल्मों में विलेन की भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्होंने कॉमेडी और सकारात्मक किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीता। ‘कुर्बानी’ में उनका मजेदार किरदार और ‘याराना’ में अमिताभ बच्चन के साथ दोस्ती की भूमिका आज भी यादगार है।

अमजद खान ने अपने बहुमुखी अभिनय से साबित किया कि वह किसी भी भूमिका में खुद को ढाल सकते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई पुरस्कार जीते और बॉलीवुड में अमिट छाप छोड़ी। 1986 में हुए एक गंभीर कार एक्सीडेंट के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी।

अंततः 27 जुलाई 1992 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन गब्बर सिंह के रूप में उनकी याद हिंदी सिनेमा में आज भी जीवित है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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