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‘Jan Neta’ Movie Review: एक्शन, इमोशन और राजनीति का शानदार मिश्रण

'Jan Neta' Movie Review

'Jan Neta' Movie Review

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और साउथ सुपरस्टार विजय की मचअवेटेड फिल्म जन नायकन (हिंदी में जन नेता) 23 जुलाई 2026 को वर्ल्डवाइड सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. जनवरी 2026 से लगातार पोस्टपोन हो रही फिल्म को थियेटरों में जगह मिल गई है. एच. विनोथ निर्देशित ‘जन नायकन’ में बॉलीवुड सुपरस्टार बॉबी देओल और पूजा हेगड़े भी हैं. फिल्म रिलीज से पहले से चर्चा में बनी हुई थी

फिल्म की शुरुआत विजय के जेल से रिहा होने के साथ होती है। जेल से निकलने के बाद वह एक ऐसी बच्ची की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लेते हैं, जिसके पिता जेलर की मौत हो चुकी होती है। दूसरी ओर, देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब भारतीय नौसेना पर एक खतरनाक हमला होता है, जिसके पीछे बॉबी देओल का किरदार होता है।

कहानी में एक टेडी बियर भी अहम भूमिका निभाता है, जिससे जुड़ा रहस्य धीरे-धीरे सामने आता है। ममता बैजू ने उस मासूम लड़की का किरदार निभाया है जिसकी परवरिश विजय करते हैं। लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि उसकी जान पर संकट आ जाता है और यहीं से विजय का सबसे दमदार और उग्र रूप देखने को मिलता है।

फिल्म में उनके अतीत की कहानी भी दिखाई गई है, जिससे उनके किरदार की गहराई समझ में आती है। वहीं पूजा हेगड़े के साथ उनका रोमांटिक ट्रैक भी कहानी को हल्का-फुल्का संतुलन देता है। कहानी पूरी तरह नई नहीं लगती, लेकिन विजय के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म भरपूर मनोरंजन देने की कोशिश करती है।

पूरी फिल्म का केंद्र विजय का किरदार है। एक्शन, स्टाइल, डांस और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के जरिए उन्हें हर मोड़ पर खास तरीके से पेश किया गया है। प्रकाश राज भ्रष्ट नेता की भूमिका में प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म में भ्रष्टाचार, जहरीली शराब से होने वाली मौतें, जन आंदोलन, आतंकवाद, पाकिस्तान का संदर्भ, आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को शामिल किया गया है।

रोबोट, ड्रोन और हाई-टेक एक्शन सीक्वेंस कहानी को बड़े पैमाने का एहसास कराते हैं। अंत में चुनावी माहौल भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है। कुल मिलाकर यह एक पूरी तरह मास एंटरटेनर फिल्म है, जिसे खास तौर पर विजय के प्रशंसकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जन नेता’ में काफी सारा राजनीतिक कंटेंट भरा हुआ है, जो बिल्कुल सीधा और स्पष्ट है. फिल्म सत्ता के दुरुपयोग, लोकतंत्र को खत्म करने और राजनेताओं द्वारा अपने स्वार्थ के लिए जनता को आपस में लड़ाने की कड़वी सच्चाई को बड़ी बेबाकी से उजागर करती है. संविधान की कॉपी हाथ में लेकर विजय का जेल से बाहर आना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है.

इसके साथ ही, फिल्म बहुत ही सहज तरीके से महिला सशक्तिकरण, ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ जैसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को भी छूकर निकलती है. इसमें आधुनिक युद्ध और बूथ कैप्चरिंग जैसी समस्याओं की झलक भी देखने को मिलती है.

दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज़ मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग देता है। ⭐⭐⭐✨

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