Last Updated: September 23, 2026

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Jatadhara Movie Review: मिथक और रहस्य के बीच आधुनिक विश्वास की है यह कहानी

November 7, 2025

Jatadhara Movie Review: मिथक और रहस्य के बीच आधुनिक विश्वास की है यह कहानी

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): ज़ी स्टूडियोज और प्रेरणा अरोड़ा की पेशकश जटाधारा, अन्य सुपरनेचुरल और माइथोलॉजिकल फिल्मों से बिल्कुल अलग नजर आती है। जहां आमतौर पर इस तरह की फिल्मों में सिर्फ डर और रहस्य दिखाए जाते हैं, वहीं जटाधारा विज्ञान, आस्था और प्राचीन रहस्यों का संतुलित मेल दिखाती है। कहानी अनंथा पद्मनाभ स्वामी मंदिर और उसके छुपे खजानों के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन असली खासियत यह है कि फिल्म में असली तांत्रिक अनुष्ठान और मंत्रों को भी दिखाया गया है, जो इसे बाकी फिल्मों से एक कदम आगे ले जाते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी शिवा की है, जिसे सुधीर बाबू ने निभाया है। शुरू में शिवा एक गोस्ट शिकारी है, जिसे आत्माओं और अज्ञात चीजों पर भरोसा नहीं होता। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसकी सोच बदलती है और वह धीरे-धीरे आध्यात्मिक विश्वास की ओर बढ़ता है। ऐसे में जिन सींस में शिवा अदृश्य शक्तियों का सामना करता है, वे बहुत रोमांचक और थ्रिलिंग लगते हैं और दर्शक को पूरी तरह स्क्रीन से जोड़कर रखते हैं।

एक्टिंग

सुधीर बाबू की एक्टिंग की बात करें तो उन्होंने शिवा को बहुत शानदार तरीके से निभाया है। सोनाक्षी सिन्हा पहली बार तेलुगु दर्शकों के सामने धना पिशाची के रोल में आती हैं और उनका अंदाज, आंखों की चमक और हाव-भाव सब बहुत डरावने और असरदार हैं। दिव्या खोसला सितारा के रूप में बहुत शांत और खूबसूरत दिखती हैं। शिल्पा शिरोडकर और इंदिरा कृष्णा अपने रोल में गहराई लाती हैं, और राजीव कनकला, रवि प्रकाश और सुभालेखा सुधाकर कहानी को असली जैसा महसूस कराते हैं।

स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स

स्क्रीनप्ले के लिए वेणकट कल्याण को सैल्यूट! उन्होंने पुराने किस्सों को आज की सोच के साथ इतनी खूबसूरती से पिरोया है। कहानी का हॉट पॉइंट है पिशाच बंधन यानी एक अनुष्ठान जो आत्माओं को खोए खजानों की रक्षा के लिए बांध देता है। हर मोड़ में थोड़ा डर, थोड़ा रोमांच और थोड़ी पहचान, सब कुछ मिला कर कहानी को नया रूप दिया गया है। साईं कृष्णा कर्णे और श्याम बाबू मेरिगा के डायलॉग्स सिम्पल होने के बावजूद दमदार और रिलेटेबल लगते हैं।

सिनेमाटोग्राफी

समीर कल्याणी की कैमरा वर्क को देखकर कह सकते हैं कि यही फिल्म की असली ताकत है। मंदिर के जटिल इंटीरियर्स, कीआरस्क्यूरो लाइटिंग और केरल के हवाई शॉट्स सब कुछ कहानी में जान डाल देते हैं। हर अनुष्ठान का सीन एक पेंटिंग जैसा लगता है, जिसमें झिलमिलाती लाइट्स और धुएँ की परछाइयां आपको स्क्रीन से बांधे रखती हैं।

म्यूजिक और साउंड

अगर म्यूजिक की बात करें तो राजीव राज ने कमाल कर दिया है। उनका संगीत और साउंड डिज़ाइन डर और सस्पेंस को और मजबूत बनाता है। क्लासिकल राग और इलेक्ट्रॉनिक ध्वनि का मिश्रण आपको पूरी फिल्म में कहानी में ले जाता है। “शिव स्तोत्रम” और “पल्लो लटके” जैसे गाने फिल्म में एनर्जी और इमोशन का जबरदस्त तड़का लगाते हैं।

स्टंट और एक्शन

अगर स्टंट की बात करें तो फिल्म ने कमाल किया है। संदीप ने मंदिर के डांस सीन में दिव्या खोसला के साथ अनुष्ठानिक मूवमेंट्स को बड़े ही फिल्मी अंदाज में दिखाया, जो भक्ति और ताकत दोनों को एक साथ दिखाते हैं। सुधीर बाबू के भूत पकड़ने वाले सीन, हथियारों के मुकाबले और आखिरी रक्तपान वाले सीन सच में बहुत दमदार हैं। मार्शल आर्ट्स और सुपरनैचुरल चीज़ों का यह मेल फिल्म को और भी रोमांचक बना देता है।

क्यों देखें

वेणकट कल्याण और अभिषेक जैसवाल द्वारा डायरेक्टेड जटाधारा एक ऐसी फिल्म है जो पारंपरिक थ्रिलर से अलग हटकर कुछ नया पेश करती है। इसमें डर, रहस्य और आध्यात्मिकता का मिश्रण है जो इसे खास बनाता है। इस तरह से अगर आप ऐसे अनुभव की तलाश में हैं जो रोमांच, रहस्य और थ्रिलर को एक साथ पेश करे, तो जटाधारा आपके लिए ही बनी है।

डायरेक्टर – वेणकट कल्याण और अभिषेक जैसवाल
राइटर – वेणकट कल्याण
कास्ट : सुधीर बाबू, सोनाक्षी सिन्हा, दिव्या खोसला, शिल्पा शिरोडकर, इंदिरा कृष्णा, राजीव कनकला, रवि प्रकाश, रोहित पाठक, झांसी और सुभालेखा सुधाकर
रेटिंग – 4/5
ड्यूरेशन – 135 मिनिट्स

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