एंटरटेनमेंट डेस्क(शेख फरीद): नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई कर्तव्य एक गंभीर और असरदार क्राइम-थ्रिलर है, जो सिर्फ एक्शन पर नहीं बल्कि इंसान के ज़मीर और उसकी ड्यूटी के बीच चलने वाली अंदरूनी लड़ाई पर फोकस करती है। निर्देशक पुलकित ने कहानी को बेहद तनावपूर्ण और वास्तविक अंदाज़ में पेश किया है, जहाँ हर फैसला किरदारों की ज़िंदगी बदल देता है।

फिल्म में Saif Ali Khan एक ऐसे पुलिस अधिकारी के किरदार में दिखाई देते हैं, जो भ्रष्ट राजनीति, सिस्टम के दबाव और अपने परिवार की सुरक्षा के बीच बुरी तरह उलझ जाता है। उनका किरदार ताकतवर होने के साथ भावनात्मक रूप से भी टूटा हुआ महसूस होता है, जिससे कहानी और ज्यादा प्रभावशाली बन जाती है।
फिल्म की कहानी SHO पवन (Saif Ali Khan) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल जाती है, जब एक पत्रकार, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी, दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया जाता है। इस घटना के बाद पवन सिर्फ सिस्टम के सवालों से नहीं, बल्कि अपने भीतर उठ रहे अपराधबोध और टूटते भरोसे से भी जूझता नजर आता है। सत्ता, भ्रष्टाचार और डर के इस अंधेरे जाल में वह सच की तलाश करते हुए एक खतरनाक पीछा और भावनात्मक संघर्ष का हिस्सा बन जाता है। फिल्म सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं बनती, बल्कि न्याय की कीमत और उसके पीछे छिपे मानसिक दबाव को भी मजबूती से दिखाती है।
Saif Ali Khan ने अपने करियर की सबसे गंभीर और परिपक्व परफॉर्मेंस में से एक दी है। यहां उनका किरदार किसी स्टाइलिश या ओवर-द-टॉप पुलिस ऑफिसर जैसा नहीं लगता, बल्कि एक ऐसा इंसान दिखता है जो अंदर से टूटा हुआ है और हर फैसले का बोझ अपने चेहरे पर लेकर चलता है। उनकी आंखों में दिखाई देने वाला डर, गुस्सा और बेबसी फिल्म को भावनात्मक गहराई देता है।
सपोर्टिंग कास्ट भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। Rasika Dugal अपनी सहज अदाकारी से कहानी में संवेदनशीलता जोड़ती हैं, जबकि Sanjay Mishra और Zakir Hussain छोटे-छोटे दृश्यों में भी गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म में हिंदी पत्रकारिता की दुनिया से जुड़े Saurabh Dwivedi का अभिनय डेब्यू भी दिलचस्प सरप्राइज साबित होता है, जो कहानी को और वास्तविक एहसास देता है।
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका माहौल और रियलिस्टिक ट्रीटमेंट है। छोटे शहरों की राजनीति, पुलिस सिस्टम का दबाव और मीडिया के बीच की खींचतान को जिस गंभीरता और ईमानदारी से दिखाया गया है, वह इसे आम मसाला थ्रिलर से अलग पहचान देता है।
यह फिल्म चमक-दमक वाले पारंपरिक पुलिस ड्रामों से अलग अपनी गंभीर और यथार्थवादी प्रस्तुति के कारण असर छोड़ती है। कहानी तेज़ एक्शन या बड़े-बड़े डायलॉग्स पर नहीं, बल्कि मुख्य किरदार के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष और दबाव पर केंद्रित रहती है। यही वजह है कि फिल्म का तनाव धीरे-धीरे दर्शकों के भीतर उतरता है और अंत तक बांधे रखता है।
निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी फिल्म को एक कच्चा, देहाती और पूरी तरह वास्तविक माहौल देते हैं। हर दृश्य में उस क्षेत्र की मिट्टी, राजनीति और डर महसूस होता है, जिससे कहानी और भी प्रामाणिक लगती है। फिल्म का वातावरण इतना प्रभावशाली है कि दर्शक खुद को उसी दुनिया का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।
अगर आपको ऐसी क्राइम ड्रामा फिल्में पसंद हैं, जो धीमी रफ्तार में गहराई से कहानी कहती हैं और जहां अभिनय सबसे बड़ी ताकत हो, तो Kartavya एक बेहद दमदार अनुभव साबित हो सकती है। मजबूत कलाकारों की बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ यह फिल्म सत्ता, ईमानदारी और इंसान की अंतरात्मा से जुड़े कठिन सवाल भी उठाती है।
दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज़ मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 3.5 स्टार रेटिंग देता है।