एंटरटेनमेंट डेस्क: भारतीय सिनेमा की विरासत को समर्पित एक खास पल और ख़ास बन गया, जब दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम के बेटे किरण शांताराम ने एक कार्यक्रम में सिद्धांत चतुर्वेदी को सम्मानित करते हुए उन्हें अपने पिता वी. शांताराम के बायोपिक के लिए बिलकुल सही चुनाव बताया।
कार्यक्रम में दर्शकों को संबोधित करते हुए किरण शांताराम ने बताया कि उनके पिता की महान सिनेमाई विरासत को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से बनाई जा रही यह फिल्म उनके लिए इसलिए भी बेहद ख़ास है क्योंकि यह फिल्म उनकी 125वीं जयंती यानी 18 नवंबर 2026 को रिलीज़ हो रही है। वी. शांताराम उन अग्रणी फिल्मकारों में से एक हैं, जिन्होंने भारतीय सिनेमा को मूक फिल्मों के दौर से लेकर साउंड और रंगीन फिल्मों के युग तक नई दिशा दी।
इस कार्यक्रम में किरण शांताराम ने सिद्धांत चतुर्वेदी पर पूरा भरोसा जताते हुए यह भी कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि उनके पिता के किरदार को सिद्धांत चतुर्वेदी जैसे मंझे हुए कलाकार निभा रहे हैं, जो उनके पिता वी. शांताराम की जीवनी के साथ पूरा न्याय करेंगे। गौरतलब है कि महान निर्देशक वी. शांताराम की रचनात्मक यात्रा और भारतीय सिनेमा पर उनके क्रांतिकारी प्रभाव को दर्शाती इस फिल्म में उनके असाधारण जीवन को दिखाया जाएगा, जिन्होंने ‘दो आँखें बारह हाथ’, ‘नवरंग’ और ‘झनक झनक पायल बाजे’ जैसी क्लासिक फिल्मों का निर्माण किया है। उनकी यह फ़िल्में सामाजिक विषयों और सिनेमाई प्रयोगों का अनोखा संगम रही हैं, जिसने भारतीय कहानी कहने की शैली पर गहरी छाप छोड़ी।
फिलहाल फ़िल्मी पंडितों की माने तो अपनी पहली फिल्म ‘गली बॉय’ में एमसी शेर के रूप में अपनी दमदार पर्फोर्मंस से दर्शकों का दिल जीत चुके सिद्धांत चतुर्वेदी के लिए वी. शांताराम का किरदार उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण रोल्स में से एक होगा। साथ ही सिद्धांत चतुर्वेदी ने भी न सिर्फ महान फिल्मकार के साहस और रचनात्मक दृष्टि के प्रति अपनी गहरी प्रशंसा व्यक्त की है, बल्कि यह विश्वास जताया है कि उनकी यह बायोपिक नई पीढ़ी के दर्शकों को वी. शांताराम की कहानी से रूबरू कराने के साथ-साथ उस विरासत को फिर से जीवित करने का प्रयास करेगी, जिसमें सिनेमा को सामाजिक बदलाव का एक शक्तिशाली माध्यम माना गया।
ऐसे में शांताराम परिवार और इंडस्ट्री के सहयोगियों द्वारा विकसित की जा रही यह फिल्म दिग्गज फिल्मकार वी. शांताराम के प्रति न सिर्फ एक सिनेमाई श्रद्धांजलि है, बल्कि भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कहानीकारों में से एक के योगदान का सांस्कृतिक उत्सव भी है।

