
एंटरटेनमेंट डेस्क : महाराष्ट्र के कई गाँव आज भी सिनेमा हॉल से दूर हैं, जहाँ नई फिल्म देखने के लिए लोगों को शहरों का रुख करना पड़ता है। लेकिन अब टेक्नोलॉजी के इस जमाने में कहानी ने नया मोड़ लिया है! ‘किस्सा शुरू टॉकीज’ नाम की एक नई पहल शुरू हुई है, जो सीधे गाँवों तक नई फिल्में पहुँचाने का काम करेगी।
मुंबई में इसका ग्रैंड लॉन्च हुआ, जहाँ महाराष्ट्र के आईटी और सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने इसका उद्घाटन किया। इस मौके पर दिग्गज अभिनेता सचिन पिळगांवकर चीफ गेस्ट के तौर पर मौजूद रहे। साथ ही दीपक तिजोरी, अभिजीत पानसे, विजू माने, समीर विद्वांस, प्रिया बेर्डे, कुशल बद्रिके, संतोष जुवेकर, पुष्कर जोग और विशाखा सुभेदार जैसे कई फिल्मी चेहरे भी इस इवेंट का हिस्सा बने।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का खास संदेश भी सुनाया गया। और सबसे बड़ी बात अब किस्सा शुरू टॉकीज सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कर्नाटक और गुजरात तक भी अपनी पहुँच बनाएगा।
ये होम सिनेमा डिवाइस एक HDMI बेस्ड स्मार्ट गैजेट है, जिसे सीधे टीवी से कनेक्ट किया जा सकता है। मतलब अब थिएटर जाने की झंझट खत्म नई फिल्में हर शुक्रवार आपके टीवी पर डाउनलोड! और कीमत? सिर्फ 99 रुपये में अपनी पसंद की फिल्म देखिए सस्ता, आसान और झकास!
इस डिवाइस में दो खास पेटेंट-पेंडिंग टेक्नोलॉजी भी हैं फैमिली सेफ मोड, जिससे आप परिवार के हिसाब से कंटेंट कंट्रोल कर सकते हैं, और डायरेक्ट वीडियो कॉल फीचर, जहाँ फिल्ममेकर सीधे गाँव के दर्शकों से जुड़ सकते हैं। साथ ही, फिल्मों की सुरक्षा के लिए एडवांस DRM और वॉटरमार्किंग टेक्नोलॉजी भी दी गई है।
इवेंट में इस प्लेटफॉर्म की पहली फिल्म की भी घोषणा की गई। मशहूर डायरेक्टर गजेंद्र अहिरे ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि यह ग्रामीण दर्शकों के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
इस आइडिया के पीछे के दिमाग संस्थापक संतोष बिराजदार, अभिषेक जठार और शिरीष शिंदे ने बताया कि हजारों गाँवों में थिएटर नहीं हैं, जिससे लोग नई फिल्मों से वंचित रह जाते हैं। इसी गैप को भरने के लिए किस्सा शुरू टॉकीज बनाया गया है, ताकि एंटरटेनमेंट हर घर तक पहुँचे और मराठी सिनेमा को नया मंच मिले।
मंत्री आशिष शेलार ने कहा, “मराठी युवाओं द्वारा शुरू किया गया यह इनिशिएटिव वाकई इनोवेटिव है और समय की जरूरत भी। ‘अपना सिनेमा, अपने घर’ की भावना के साथ फिल्मों को गाँव-गाँव पहुँचाना एक शानदार प्रयास है। इससे मराठी फिल्मों को नया ऑडियंस मिलेगा और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा होगा।”
सचिन पिळगांवकर ने कहा, “आज भी कई गाँवों में थिएटर नहीं हैं और लोगों को फिल्म देखने के लिए 50 किलोमीटर तक सफर करना पड़ता है। ऐसे में यह पहल बहुत जरूरी और काबिल-ए-तारीफ है। यह ग्रामीण दर्शकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि इससे दर्शक, निर्माता और निर्देशक तीनों को फायदा होगा। संतोष बिराजदार मेरे पुराने साथी हैं, उन्हें और उनकी टीम को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएँ।”
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