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Movie Review: “साहस, बलिदान और स्वराज्य की गर्जना, छत्रपति शिवाजी महाराज की अमर गाथा” ‘राजा शिवाजी’

Movie Review

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): राजा शिवाजी” एक भव्य ऐतिहासिक फिल्म है जो छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्भुत साहस, बुद्धिमत्ता और स्वराज्य के सपने को बड़े प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर जीवंत करती है। फिल्म की कहानी दर्शकों को उस दौर में ले जाती है जहाँ हर पल संघर्ष और आत्मसम्मान की लड़ाई थी।

फिल्म की कहानी उस दौर से शुरू होती है जब चारों तरफ जुल्म का साया था और दक्कन की धरती अपनों के ही खून से लाल हो रही थी. साल 1629, जब छत्रपति शिवाजी महाराज अपनी मां के गर्भ में थे, तभी देवगिरी किले (दौलताबाद) में एक ऐसी विश्वासघाती घटना घटी जिसने इतिहास की धारा बदल दी. सुल्तान बुरहान निजाम शाह के आदेश पर शिवाजी महाराज के नाना, लखुजी राजे जाधव की उनके बेटों और पोते के साथ दरबार में बेरहमी से हत्या कर दी गई. एक तरफ मुगलों की गिद्ध दृष्टि थी, तो दूसरी तरफ निजाम और आदिलशाह की चक्की में गांव के गांव उजड़ रहे थे.

रितेश देशमुख ने इस बार सिर्फ पर्दे पर अपनी मौजूदगी से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे अपनी सोच और मेहनत से भी गहरी छाप छोड़ी है। इस फिल्म को देखकर साफ महसूस होता है कि उन्होंने कुछ अलग और यादगार बनाने की ठान ली थी और उसमें काफी हद तक सफल भी रहे हैं।

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आम तौर पर हिंदी फिल्मों में रितेश एक कलाकार के तौर पर नजर आते हैं, लेकिन जब बात मराठी सिनेमा और विषय छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा भव्य हो, तो जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की भावना और गौरव से जुड़ा विषय है। ऐसे में एक मराठी कलाकार और पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे होने के नाते उन पर अतिरिक्त अपेक्षाएँ थीं।

इतने संवेदनशील विषय में छोटी सी गलती भी दर्शकों को खटक सकती थी, लेकिन रितेश ने संतुलन और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ इस चुनौती को संभाला है। उनकी समझदारी और धैर्य फिल्म के हर पहलू में झलकता है।

लेखन में गर्व और देशभक्ति का मेल इस तरह से पिरोया गया है कि वह दर्शकों के दिल तक सीधा पहुँचता है। निर्देशन के जरिए रितेश ने यह दिखा दिया कि वह सिर्फ एक सक्षम अभिनेता ही नहीं, बल्कि बड़े और ऐतिहासिक विषयों को संभालने की क्षमता रखने वाले निर्देशक भी हैं। यह फिल्म उनके करियर में एक महत्वपूर्ण और साहसी कदम के रूप में देखी जा सकती है।

एक्टिंग की बात करें तो इस फिल्म में Riteish Deshmukh ने सच में अपने करियर का एक नया मुकाम छू लिया है। उन्होंने महाराज के किरदार को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उसे पूरी शिद्दत से जिया है उनकी गरिमा, ताकत और भावनात्मक गहराई हर सीन में साफ महसूस होती है, जिससे स्क्रीन पर आपको सिर्फ ‘राजा’ ही नजर आते हैं।

Sanjay Dutt अपनी दमदार मौजूदगी से हर फ्रेम को मजबूत बनाते हैं, वहीं Abhishek Bachchan भी शानदार फॉर्म में नजर आते हैं। उनका किरदार कहानी को मजबूती देता है, और खास बात ये है कि वे मराठी डायलॉग्स भी बड़ी सहजता से बोलते दिखते हैं।

Vidya Balan ने अपनी प्रभावशाली अदाकारी और तीखे संवादों से पूरी महफिल अपने नाम कर ली है उनकी डायलॉग डिलीवरी एकदम सटीक बैठती है। Bhagyashree की स्क्रीन प्रेजेंस ठीक-ठाक है, लेकिन उनकी मराठी थोड़ी कमजोर लगती है।

वहीं Jitendra Joshi और Sachin Khedekar ने अपनी सधी हुई और भरोसेमंद एक्टिंग से फिल्म को एक मजबूत आधार दिया है। Boman Irani और Genelia Deshmukh छोटे लेकिन असरदार रोल में अपनी छाप छोड़ते हैं और आखिर में, क्लाइमेक्स में Salman Khan का स्पेशल अपीयरेंस ऐसा है कि थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है एकदम पैसा वसूल मोमेंट!

कुल मिलाकर, “राजा शिवाजी” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि गर्व, प्रेरणा और इतिहास को महसूस करने का एक अनुभव है। यह फिल्म हर भारतीय को जरूर देखनी चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो वीरता और देशभक्ति की कहानियों को पसंद करते हैं। कुल मिलाकर दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज़ मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 5 में से 4 स्टार की रेटिंग देता है।

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