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नहीं रही पार्श्व गायिका जानकी अम्मा, PM मोदी ने जाहिर किया दुख

S Janaki Amma no more

एंटरटेनमेंट डेस्क: पार्श्व गायिका जानकी अम्मा अब हमारे बीच नहीं रही हैं। उनका 88 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने पार्श्व गायिका जानकी अम्मा अपनी आखिरी सांस ली। गायिका की पोती ने उनके निधन की जानकारी दी है। पीएम मोदी ने भी जानकी अम्मा ने भी निधन पर दुख जाहिर किया है।

गायिका की पोती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर लिखा- बहुत दुख के साथ मैं अपनी प्यारी दादी और मशहूर सिंगर श्रीमती एस. जानकी के निधन की खबर शेयर कर रही हूं। उन्होंने अपने परिवार के प्यार के बीच शांति से दुनिया को अलविदा कहा। भले ही हमारा दिल भारी है, लेकिन हम उनके शानदार जीवन और अपने सदाबहार संगीत से लाखों लोगों को दी गई अपार खुशी के लिए शुक्रगुजार भी हैं। दुनिया के लिए वह एक मशहूर आवाज थीं, जिनके गाने अनगिनत यादों का हिस्सा बने। हमारे लिए वह एक प्यारी दादी थीं, जिनका अपनापन, विनम्रता, दयालुता और शालीनता हमेशा हमारे साथ रहेगी। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस मुश्किल समय में हमारे परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करें, क्योंकि हम इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। आपके प्यार, प्रार्थनाओं और समझदारी के लिए धन्यवाद।

वहीं पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- प्रसिद्ध पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का निधन संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति है। अलग-अलग भाषाओं में उनके गाने कई पीढ़ियों तक लोकप्रिय रहे। उन्होंने बेमिसाल खूबसूरती और विविधता के साथ हर भावना को स्वर दिया। उनकी मधुर आवाज आने वाले सालों में भी सुनने वालों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार, अनगिनत प्रशंसकों और पूरे संगीत जगत के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।

करियर

एस. जानकी ने कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी समेत 20 भाषाओं में 48,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए। उन्होंने सबसे अधिक गाने कन्नड़ भाषा और उसके बाद मलयालम भाषा में गाए। उन्होंने 1957 में तमिल फिल्म विधियिन विलायट्टू से प्लेबैक सिंगिंग में डेब्यू किया था। अपने पहले ही वर्ष में उन्होंने छह अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। 1970 के दशक से वह मलयालम सिनेमा की सबसे प्रमुख महिला आवाज बन गईं। उन्होंने लगभग सभी दिग्गज मलयालम संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। जानकी ने 1970 में बेस्ट सिंगर के तौर पर अपना पहला केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड जीता। अगले लगभग 15 सालों तक इस कैटेगरी में उनका दबदबा रहा। 1957 से 2017 तक चले अपने करियर में उन्होंने चार राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड और 33 राज्य फिल्म अवॉर्ड जीते।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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