Dainik Savera Times

Ramanaya Movie Review: रणबीर की मर्यादा और साई पल्लवी की गरिमा ने जीता दिल; नितेश तिवारी ने रचा भव्य सिनेमाई इतिहास

Ramanaya Movie Review

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): कुछ कहानियां सिर्फ पर्दे पर नहीं दिखाई जातीं, बल्कि दर्शकों के दिलों में उतर जाती हैं। रामायण भी ऐसी ही एक अमर गाथा है, जिसकी भावनाएं और आदर्श सदियों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। निर्देशक नितेश तिवारी ने इस महाकाव्य को आधुनिक सिनेमाई तकनीक, शानदार विजुअल्स और दमदार कलाकारों के साथ जिस भव्यता से प्रस्तुत किया है, वह दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।

रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की मुख्य भूमिकाओं वाली ‘रामायण’ केवल एक पौराणिक कहानी का पुनर्प्रस्तुतीकरण नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की तकनीकी क्षमता और रचनात्मक महत्वाकांक्षा का शानदार उदाहरण है। फिल्म की शुरुआत से लेकर अंतिम दृश्यों तक इसका विशाल कैनवस, संगीत और कलाकारों का अभिनय दर्शकों को बांधे रखता है।

कहानी: जानी-पहचानी गाथा, लेकिन देखने का अंदाज बिल्कुल भव्य

फिल्म की कहानी रावण के उदय, उसकी शक्ति और महत्वाकांक्षा से शुरू होकर अयोध्या में भगवान राम के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं तक पहुंचती है। राम का बचपन, शिक्षा, विश्वामित्र के साथ यात्रा, सीता स्वयंवर, विवाह और फिर 14 वर्षों का वनवास कहानी को भावनात्मक आधार देते हैं।

राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास, शूर्पणखा से जुड़ा घटनाक्रम और अंततः सीता हरण फिल्म को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हैं।

फिल्म की खूबी यह है कि निर्देशक ने केवल प्रमुख घटनाओं को दिखाने के बजाय उनके पीछे छिपी भावनाओं, रिश्तों और परिस्थितियों को भी पर्याप्त स्थान दिया है। पहला भाग आगामी महायुद्ध की मजबूत पृष्ठभूमि तैयार करता है और दर्शकों में अगली कड़ी को लेकर उत्सुकता जगाता है।

निर्देशन: नितेश तिवारी ने रची अद्भुत सिनेमाई दुनिया

‘दंगल’ जैसी शानदार फिल्म देने वाले नितेश तिवारी ने एक बार फिर अपनी निर्देशन क्षमता का परिचय दिया है। रामायण जैसी संवेदनशील और विशाल कथा को पर्दे पर उतारना आसान नहीं था, लेकिन निर्देशक ने इसके सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को समझते हुए कहानी को भव्यता के साथ प्रस्तुत किया है।

राम और लक्ष्मण का भाईचारा, राम-सीता का प्रेम, कैकेयी के साथ भावुक प्रसंग और रावण की महत्वाकांक्षा कहानी को अलग-अलग भावनात्मक रंग देते हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि फिल्म अपनी मूल कथा और उसके आदर्शों को सम्मान देती है। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कहानी की आत्मा को दबाने के बजाय उसे और प्रभावशाली बनाने के लिए किया गया है।

VFX और सिनेमैटोग्राफी: आंखों के सामने जीवंत होता पौराणिक संसार

फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका भव्य विजुअल ट्रीटमेंट है। अयोध्या की दिव्यता, मिथिला की सुंदरता, लंका का वैभव और जंगलों की विशालता को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा गया है।

DNEG की विजुअल इफेक्ट्स टीम ने पौराणिक दुनिया को जीवंत बनाने में शानदार काम किया है। दिव्य अस्त्र-शस्त्र, विशाल महल, भव्य लोकेशन और एक्शन सीक्वेंस फिल्म के स्तर को ऊंचाई देते हैं।

विशेष रूप से रावण से जुड़े दृश्य और जटायु के साथ उसका संघर्ष दर्शकों को प्रभावित करते हैं। पंकज कुमार और महेश लिमये की सिनेमैटोग्राफी हर फ्रेम को एक अलग भव्यता देती है।

यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि भारतीय सिनेमा भी वैश्विक स्तर की विजुअल दुनिया रचने की क्षमता रखता है।

अभिनय: यश ने रावण के रूप में छाप छोड़ी, रणबीर बने मर्यादा पुरुषोत्तम

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट और कलाकारों का अभिनय है।

रावण के किरदार में यश सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ते हैं। उनकी दमदार आवाज, शानदार स्क्रीन प्रेजेंस, संवाद अदायगी और व्यक्तित्व किरदार को एक अलग ऊंचाई देते हैं। पर्दे पर उनकी एंट्री के साथ ही दृश्य का प्रभाव बदल जाता है। उन्होंने रावण की शक्ति, बुद्धिमत्ता, महत्वाकांक्षा और अहंकार को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है। यश की मौजूदगी फिल्म के सबसे यादगार आकर्षणों में से एक है।

रणबीर कपूर ने भगवान राम की भूमिका में संयम, शांति और गरिमा का बेहतरीन संतुलन बनाया है। उनके चेहरे के भाव और संवादों में मर्यादा का भाव दिखाई देता है। खासकर वनवास स्वीकार करने और कैकेयी के साथ भावनात्मक दृश्यों में उनका अभिनय दिल को छूता है।

साई पल्लवी सीता के रूप में बेहद खूबसूरत और स्वाभाविक नजर आती हैं। उनकी सादगी, भावनात्मक अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास किरदार को खास बनाते हैं। उन्होंने सीता के व्यक्तित्व की गरिमा और आंतरिक शक्ति को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है।

रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में प्रभावशाली हैं। राम के प्रति उनका समर्पण, संवाद और आक्रामक अंदाज किरदार में जान डालता है। रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा के रूप में अपनी छाप छोड़ती हैं।

लारा दत्ता कैकेयी के किरदार में शानदार हैं। उनके चेहरे के भाव और अभिनय की गहराई इस किरदार के भावनात्मक पहलुओं को बखूबी सामने लाती है। अरुण गोविल राजा दशरथ के रूप में प्रभावशाली हैं, जबकि अनुपम खेर की आवाज में जटायु का किरदार भी खास आकर्षण रखता है।

संगीत: रहमान और हैंस जिमर की जोड़ी ने बढ़ाया फिल्म का प्रभाव

एआर रहमान और हैंस जिमर जैसे विश्वस्तरीय संगीतकारों का साथ आना फिल्म की खास उपलब्धियों में शामिल है। संगीत में आध्यात्मिकता, भावनाओं और भव्यता का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को और प्रभावशाली बनाता है। जहां भावुक प्रसंगों में संगीत दिल को छूता है, वहीं महत्वपूर्ण घटनाओं में इसका प्रभाव फिल्म की भव्यता को और बढ़ा देता है।

अंतिम फैसला: हर पीढ़ी के लिए एक यादगार सिनेमाई अनुभव

‘रामायण’ की सबसे बड़ी जीत यह है कि यह भारतीय संस्कृति की एक परिचित महागाथा को नई पीढ़ी के सामने आधुनिक और शानदार सिनेमाई रूप में पेश करती है। फिल्म में भव्यता है, भावनाएं हैं, दमदार अभिनय है और ऐसा विजुअल अनुभव है, जो बड़े पर्दे पर देखने का असली आनंद देता है।

यश का रावण, रणबीर का राम और साई पल्लवी की सीता फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धियां हैं। नितेश तिवारी का निर्देशन, DNEG के शानदार विजुअल इफेक्ट्स और एआर रहमान-हैंस जिमर का संगीत इसे एक विशेष सिनेमाई अनुभव बनाते हैं।

कुछ दृश्यों में कहानी का विस्तार जरूर महसूस होता है, लेकिन यह फिल्म की भव्यता और भावनात्मक प्रभाव को कम नहीं करता।

हमारी राय: ‘रामायण’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय महाकाव्य को विश्वस्तरीय सिनेमाई पहचान दिलाने की एक शानदार कोशिश है। परिवार के साथ बड़े पर्दे पर देखने लायक यह फिल्म खासकर IMAX और 3D में एक यादगार अनुभव दे सकती है। दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज़ मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 4 स्टार की रेटिंग देता है।

Exit mobile version