Ratan Tata Property ; नेशनल डेस्क : रतन टाटा की वसीयत के खुलासे ने उनके जीवन और कार्यों के प्रति सम्मान को और भी मजबूत किया है। उनके निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि वह न केवल एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि एक परोपकारी और समाजसेवी भी थे। आइए इस वसीयत में किए गए प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर डालते हैं।
- परोपकारी संस्थाओं को दान
रतन टाटा ने अपनी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा अपनी दो परोपकारी संस्थाओं तन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट (RTET) को दान किया है। इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में काम करना है, जो रतन टाटा के जीवन के मूल्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है। अगर हम उनकी कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत की बात करें तो लगभग 3,800 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें टाटा संस के शेयर और अन्य मूल्यवान संपत्तियां शामिल हैं।

- “नो-कंटेस्ट क्लॉज”
रतन टाटा की वसीयत में एक विशेष शर्त शामिल है जिसे “नो-कंटेस्ट क्लॉज” कहा जाता है। इसके तहत, अगर कोई व्यक्ति उनकी वसीयत को चुनौती देता है, तो वह वसीयत से मिलने वाले सभी अधिकार और लाभ खो देगा। यह शर्त टाटा संस के शेयरों की बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए भी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनकी संपत्ति केवल उन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो, जिनके लिए उन्होंने दान दी थी। इस कदम से उनकी संपत्ति की स्थिरता और सही दिशा में उपयोग सुनिश्चित होगा।
- संपत्ति का वितरण
रतन टाटा की वसीयत में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है:
- बैंक डिपॉजिट (385 करोड़ रुपये), 11 लग्जरी कारें, 65 घड़ियां (चोपार्ड, पाटेक फिलिप जैसे ब्रांड), 52 पेन (कार्टियर, मॉन्ट ब्लांक जैसे ब्रांड), पेंटिंग्स और अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 800 करोड़ रुपये आंका गया।
यह संपत्ति 3 हिस्सों में बांटी गई
- उनकी सौतेली बहनों, शिरीन और डीना जेजेभोय को संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा दिया गया।
- मोहिनी एम दत्ता, जो टाटा ग्रुप में लंबे समय तक रतन टाटा के साथ काम कर चुकी थीं, को एक तिहाई हिस्सा दिया गया।
- उनके भाई जिमी टाटा को मुंबई के जुहू स्थित पारिवारिक संपत्ति और कुछ आभूषण मिले।
- रतन टाटा की परोपकारी दृष्टि
रतन टाटा का जीवन केवल व्यापार की दुनिया तक सीमित नहीं था। वह समाज में बदलाव लाने और समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे। उनकी संपत्ति का अधिकांश हिस्सा उनके द्वारा स्थापित परोपकारी संस्थाओं को सौंपा गया, जो उनके जीवनभर के कार्यों को प्रतिबिंबित करते हैं। रतन टाटा की यह वसीयत यह भी बताती है कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में अपनी संपत्ति को केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए रखा। उनकी यह वसीयत समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।
रतन टाटा की वसीयत का खुलासा उनके जीवन के सबसे बड़े मूल्यों को और मजबूती से स्थापित करता है। उन्होंने न केवल अपनी संपत्ति का एक हिस्सा परिवार और करीबी सहयोगियों में बांटा, बल्कि अधिकांश हिस्से को परोपकारी उद्देश्यों के लिए समर्पित किया। उनका यह कदम हमें यह याद दिलाता है कि सच्चे उद्योगपति वही होते हैं जो समाज की भलाई के लिए अपनी सफलता का इस्तेमाल करते हैं।