एंटरटेनमेंट डेस्क: प्रोड्यूसर रवि भागचंदका अब ला रहे हैं मराठी की सराही गई फिल्म फ्यूनरल का हिंदी अवतार और अभी इसका राइटिंग स्टेज फुल ऑन चालू है। दिल छू लेने वाली कहानियों के शौकीन रवि को फ्यूनरल इसलिए खास लगी क्योंकि इसमें ईमानदारी, सार्वभौमिक भावनाएँ और जीवन-मृत्यु पर पूरी तरह हटके नज़रिया है।
रवि बताते हैं, ‘फ्यूनरल में जो चीज़ सबसे ज़्यादा दिल में बस गई, वो थी इसकी इमोशनल ईमानदारी और इसकी सार्वभौमिक थीम। मौत हर इंसान की कहानी का हिस्सा है, लेकिन फिल्मों में इसे अक्सर सिर्फ दुख के चश्मे से दिखाया जाता है… यहाँ पहली बार गर्मजोशी, जश्न और मानवता का कॉम्बो देखने को मिला।’
वो आगे कहते हैं कि जहाँ ज़्यादातर कहानियाँ मौत को सिर्फ ग़म और खोने के एंगल से दिखती हैं, फ्यूनरल ने पूरा वाइब ही बदल दिया। “इस फिल्म का इमोशनल लेंस बड़ा यूनिक है ये झलकता है कि किसी का जाना भी एक रिफ्लेक्शन, कनेक्शन और कभी-कभी सेलिब्रेशन का मोमेंट बन सकता है,” रवि का कहना है।
राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी इस मराठी फिल्म ने रवि पर गहरा असर छोड़ा। ‘ये फिल्म मराठी कल्चर में गहराई से जुड़ी है, फिर भी इसके इमोशंस हर किसी को कनेक्ट करती हैं। असली पावरफुल कहानी वही होती है जो भाषा और रीजन से ऊपर उठ जाए वो कहते हैं। मुझे लगा ये कहानी हिंदी में भी आनी चाहिए, लेकिन अपनी सोल और ऑथेंटिसिटी के साथ।’
आज जब रीजनल सिनेमा पूरे देश के स्टोरीटेलिंग गेम को अपग्रेड कर रहा है, रवि मानते हैं कि अच्छी कहानी किसी लेबल की मोहताज नहीं होती। “कहानी कहीं से भी आ सकती है ओरिजिनल आइडिया, स्क्रिप्ट, किताब या अडैप्टेशन… मेरे लिए सबसे इंपॉर्टेंट है इमोशनल कनेक्ट,” वो साफ कहते हैं। आखिर में ऑडियंस की ऑनेस्टी और स्ट्रॉन्ग स्टोरीटेलिंग से जुड़ती है, ये मैटर नहीं करता कि कहानी कहाँ से आई है।
“राइटिंग चल रही है… टाइमलाइन अभी फिक्स नहीं हैं,” रवि ने हिंट दिया। फ्यूनरल के ज़रिए रवि भागचंदका एक ऐसी कहानी बड़े ऑडियंस तक पहुँचाना चाहते हैं जो सिर्फ़ लाइफ़ नहीं, बल्कि रिश्तों और इंसानियत को दिल से सेलिब्रेट करे फुल इमोशंस, ज़ीरो फ़िल्टर।

