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भारतीय संगीत की विविधता ही उसकी ताकत, अलग शैलियों में गाने पर बोलीं श्रेया घोषाल

Shreya Ghoshal on Indian Music

Shreya Ghoshal on Indian Music

भारतीय संगीत जगत में श्रेया घोषाल का नाम खास सम्मान के साथ लिया जाता है। दो दशक से ज्यादा समय से वह अपनी आवाज के दम पर हिंदी सिनेमा ही नहीं, बल्कि कई भाषाओं के संगीत को नई ऊंचाई देती आई हैं।

हाल ही में उनके कई नए गाने रिलीज हुए हैं, जिनमें ‘इंकलाबी जिद्दी’, ‘मातृभूमि’, ‘असलू सिनेमा’, ‘गाना गुंजूर’, ‘ओ माई री’ और ‘थलोड़ी मरायुवथेविदे नी’ जैसे ट्रैक शामिल हैं। इन गीतों में कहीं देशभक्ति और बदलाव की भावना है, तो कहीं रिश्तों की नर्मी और लोक संगीत की महक। वहीं कुछ गानों में आधुनिक सिनेमा की ऊर्जा भी साफ महसूस होती है।

इन अलग-अलग शैलियों में काम करने के अनुभव पर श्रेया कहती हैं, “लगातार इतने विविध तरह के गाने गाना मेरे लिए बेहद खास रहा है। अलग-अलग भावनाओं और संगीत की शैलियों के बीच काम करते हुए यह और भी गहराई से समझ आता है कि भारतीय संगीत कितना व्यापक और रंगों से भरा हुआ है। हर गीत अपनी संस्कृति और कहानी के साथ आता है, लेकिन अंत में जो चीज श्रोताओं तक पहुंचती है, वह उसकी सच्ची भावना होती है।”

वह आगे कहती हैं, “एक सिंगर के तौर पर इतनी अलग कहानियों को आवाज देना बेहद संतोष देता है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे इस संगीत यात्रा का हिस्सा बनने का मौका मिला। संगीत किसी भाषा या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, असल में भावनाएं ही उसे सबके दिल से जोड़ती हैं।”

श्रेया घोषाल को अक्सर ‘डायनामिक्स की रानी’ कहा जाता है। करियर की शुरुआत में ही ‘बैरी पिया’ और ‘डोला रे डोला’ जैसे गीतों ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद ‘धीरे जलना’, ‘ये इश्क हाय’, ‘फेरारी मोन’, ‘जीव रंगला’ और ‘मायावा थूयावा’ जैसे गीतों के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। उनके नाम पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के साथ केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना के राज्य पुरस्कार तथा बीएफजेए अवॉर्ड भी दर्ज हैं

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