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Shweta Tripathi ने बर्लिनाले 2026 में ‘सिनेमा की छात्रा’ के रूप में की शिरकत, ‘पहली बार’ के जादू का जश्न

Shweta Tripathi attends Berlinale 2026 

Shweta Tripathi attends Berlinale 2026 

एंटरटेनमेंट डेस्क:  कहते हैं, ज़िंदगी की पहली बार वाली चीज़ें हमेशा याद रहती हैं। श्वेता त्रिपाठी के लिए यह सफर मंच पर प्रदर्शन करने की खुशी से शुरू हुआ। जब उन्हें यह भी नहीं पता था कि अभिनेता होना क्या होता है, तब भी उन्हें मंच से प्यार था और वे उसी दुनिया में आगे बढ़ना चाहती थीं। यही जुनून उन्हें उनकी पहली फिल्म मसान तक लेकर गया, जिसका प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ और जिसने FIPRESCI पुरस्कार सहित दो अवॉर्ड जीते।

यह खबर उन्हें एक और खास “पहली बार” के दौरान मिली। श्वेता अपनी फिल्म हरामखोर के साथ पहली बार इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ लॉस एंजेलिस में शामिल हुई थीं, जहां उन्हें बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। उसी दौरान वे लॉस एंजेलिस से सैन फ्रांसिस्को की रोड ट्रिप पर थीं, जब निर्देशक नीरज घेवन का फोन आया कि मसान कान्स जा रही है।

श्वेता कहती हैं, “उस पल ने सिनेमा को देखने का मेरा नज़रिया बदल दिया। यह सिर्फ रिलीज़ या बॉक्स ऑफिस के बारे में नहीं था। यह कहानियों के सफर करने, बातचीत शुरू होने और संस्कृतियों के मिलने के बारे में था।”

इस साल श्वेता ने पहली बार बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (बर्लिनाले) में हिस्सा लिया, जो लंबे समय से उनकी इच्छा सूची में था। अब एक निर्माता भी बन चुकी श्वेता ने इस फेस्टिवल को एक ‘सिनेमा की छात्रा’ की तरह अनुभव किया। उन्होंने पैनल चर्चाओं में हिस्सा लिया, अंतरराष्ट्रीय फिल्में देखीं और दुनियाभर के फिल्मकारों से गहराई से बातचीत की। उन्होंने अलग-अलग संस्कृतियों की फिल्में देखीं, चार्ली चैपलिन की फिल्म की लाइव ऑर्केस्ट्रा स्क्रीनिंग अटेंड की और हॉलीवुड फिल्म एडोलसेंस के लेखक जैक थॉर्न से मुलाकात की।

वे कहती हैं, “मेरे लिए फिल्म फेस्टिवल वो जगह हैं, जहां सिनेमा अलग तरह से सांस लेता है। यहां आपको एहसास होता है कि कहानियां किसी एक देश की नहीं होतीं, वे सबकी होती हैं।”

एक अभिनेत्री और निर्माता के रूप में आगे बढ़ते हुए श्वेता अब अपने अगले कदम को लेकर स्पष्ट हैं – वे अपनी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल सर्किट तक ले जाना चाहती हैं। वो आगे कहती है, “मुझे फिल्म फेस्टिवल से प्यार है। मुझे वहां की बातचीत, जिज्ञासा और कहानी कहने का जश्न पसंद है। यह तो बस शुरुआत है। वहां फिर मिलते हैं।”

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