एंटरटेनमेंट डेस्क : समकालीन संस्कृति को आकार देने वाले मशहूर फिल्म निर्माताओं और अभिनेताओं से लेकर लेखकों, संगीतकारों और कलाकारों तक, इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट (IFP) अपने 16वें सीज़न के लिए रचनात्मक हस्तियों का एक शानदार समूह एक साथ ला रहा है। यह आयोजन २४ और २५ अक्टूबर, २०२६ को मुंबई के महबूब स्टूडियो में होगा। दो दिनों तक चलने वाला यह फेस्टिवल, बातचीत, मास्टरक्लास, वर्कशॉप और इंटरैक्टिव अनुभवों के ज़रिए दर्शकों को सिनेमा, स्ट्रीमिंग, लेखन, संगीत, विज्ञापन, डिजिटल मीडिया और कला के क्षेत्रों में किए गए कुछ बेहतरीन कामों के पीछे की सोच और प्रक्रियाओं से रूबरू कराएगा।
इस बातचीत का नेतृत्व राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता वेट्रिमरन कर रहे हैं, जो ‘मेकिंग ऑफ अ मॉडर्न ऑट्योर’ (Making of a Modern Auteur) के ज़रिए सिनेमा के प्रति अपने नज़रिए और फिल्म निर्माण की कला पर चर्चा करेंगे। अभिनेता और निर्माता राणा दग्गुबाती ‘मोर दैन अ स्टार: ऑन नर्चरिंग द न्यू वेव’ (More Than a Star: On Nurturing the New Wave) के ज़रिए दर्शकों को पर्दे के पीछे के अपने सफर और हुई रचनात्मक प्रतिभाओं को निखारने के लिए किए गए अपने प्रयासों के बारे में बताएंगे। वहीं, हुमा कुरैशी ‘मेनी लाइव्स ऑफ हुमा कुरैशी’ (Many Lives of Huma Qureshi) में एक अभिनेत्री के तौर पर अपने सफर, अपने निभाए गए किरदारों और उन रचनात्मक फैसलों पर बात करेंगी, जिन्होंने उनके करियर को आकार दिया है।
भारतीय सिनेमा और स्ट्रीमिंग जगत की दो सबसे दमदार कलाकार, कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे को एक साथ मंच पर देखा जा सकेगा। वे ‘ऑन प्लेइंग पावर फीट. अक्का’ (On Playing Power Ft. AKKA) सत्र में हिस्सा लेंगी, जहाँ वे नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘अक्का’ में अपने किरदारों और पर्दे पर ‘शक्ति’ (पावर) को दर्शाने के अपने अनुभवों के बारे में चर्चा करेंगी। ‘मेकिंग हर मार्क’ (Making Her Mark) में मृणाल ठाकुर टेलीविजन, हिंदी और तेलुगु सिनेमा के अपने सफर पर बात करेंगी। वह उन किरदारों के बारे में बताएंगी जिन्होंने उनके करियर को आकार दिया है, और उन फैसलों पर चर्चा करेंगी जो एक अभिनेत्री के तौर पर उनकी पहचान बनती हैं। इस कार्यक्रम में शोभिता धूलिपाला भी शामिल होंगी, जिससे इस फेस्टिवल में बेहतरीन अभिनय प्रतिभाओं का एक साथ आना और भी खास हो जाएगा। नित्या मेनन ‘बिकमिंग कनमनी’ में दर्शकों को अपनी रचनात्मक प्रक्रिया की एक झलक दिखाएंगी, जबकि प्रतीक गांधी, रत्ना पाठक शाह के साथ ‘द एक्टर एट वर्क’ में अभिनय और चरित्र-निर्माण की बारीकियों पर चर्चा करेंगे। प्रख्यात फिल्म निर्माता सुजॉय घोष भी ‘सबवर्टिंग एक्सपेक्टेशन्स इन सिनेमा’ नामक एक संवाद का हिस्सा होंगे, जिसमें उन रचनात्मक विकल्पों की पड़ताल की जाएगी जो कहानी कहने की परिचित परंपराओं को चुनौती देते हैं और दर्शकों को अनुमान लगाने के लिए मजबूर करते हैं।
सिनेमा से परे, इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट (IFP ) सीज़न १६ लेखन, साहित्य, कला, विज्ञापन और संगीत के क्षेत्रों से रचनात्मक आवाज़ों को एक साथ लाएगा। जूही चतुर्वेदी और वरुण ग्रोवर ‘ऑन क्राफ्ट, क्रिएटिविटी एंड राइटिंग अक्रॉस मीडियम्स’ में एक साथ आएंगे, वहीं सूनी तारापोरेवाला अनुराग माइनस वर्मा पॉडकास्ट लाइव में शामिल होंगी, सत्यांशु सिंह ‘किलिंग योर डार्लिंग्स’ का नेतृत्व करेंगे और प्रशंसित पटकथा लेखक क्रेग मैज़िन एक वर्चुअल ‘एएमए’ के माध्यम से दर्शकों से जुड़ेंगे। सोनम वांगचुक ‘हाउ टू लिव सिंपली’ में जीवन और स्थिरता से जुड़े विचारों पर चर्चा करेंगी, वहीं राघव केके ‘आर्ट आफ्टर द एल्गोरिदम एंड एआई’ के माध्यम से एल्गोरिदम और एआई के युग में रचनात्मकता का विश्लेषण करेंगे। शेफाली शाह ‘पुस्तकालय फीट. द ऑडेसिटी ऑफ बीइंग’ में सौरभ द्विवेदी के साथ जुड़ेंगी। विज्ञापन जगत के फिल्म निर्माता प्रकाश वर्मा और अमित शर्मा ‘व्हाट मेक्स अ गुड ऐड?’ नामक सत्र के लिए एक साथ आएंगे, जिसमें स्वतंत्र संगीत, इम्प्रोवाइजेशन, फोटोग्राफी, डिजाइन और डिजिटल स्टोरीटेलिंग जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
आईएफपी सीजन १६ और अपनी आगामी नेटफ्लिक्स और वाईआरएफ सीरीज ‘अक्का’ के बारे में बात करते हुए कीर्ति सुरेश ने बताया, “इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट के बारे में मुझे जो बात सबसे अच्छी लगती है, वह यह है कि यह ऐसे लोगों को एक साथ लाता है जो कहानी सुनाने (स्टोरीटेलिंग) के प्रति सच्चे दिल से जुनूनी हैं, भले ही वे अपनी रचनात्मक यात्रा के किसी भी पड़ाव पर हों। यह एक ऐसी जगह है जहाँ नए विचार, नई आवाज़ें और रचनात्मकता के विभिन्न रूप एक ही छत के नीचे एक साथ आते हैं। एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जिसने लगातार नए किरदारों और कहानियों को खोजते हुए विकास किया है, मुझे प्रयोग करने की वह भावना बेहद प्रेरणादायक लगती है। मैं आईएफपी २०२६ का हिस्सा बनने, अन्य क्रिएटर्स और दर्शकों से जुड़ने, और कहानी कहने की कला, आज के समय में कहानियां सुनाने के बदलते तरीकों और अपनी आने वाली सीरीज़ – नेटफ्लिक्स और वाईआरएफ की ‘अक्का’ – के बारे में बातचीत करने के लिए बहुत उत्साहित हूँ।”
आईएफपी सीजन १६ और अपनी आगामी नेटफ्लिक्स और वाईआरएफ सीरीज ‘अक्का’ के बारे में बात करते हुए राधिका आप्टे ने बताया, “आईएफपी ने क्रिएटर्स, कहानीकारों और कलाकारों का एक बेहतरीन समुदाय तैयार किया है, जो लगातार खुद को अलग तरह से सोचने और निडर होकर कुछ नया रचने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। जो बात इसे खास बनाती है, वह है लोगों का एक साथ आना, अपने विचार साझा करने और स्थापित मान्यताओं को चुनौती देने के लिए एक-दूसरे से सीखते हैं। मेरा हमेशा से यही मानना रहा है कि रचनात्मकता तभी पनपती है जब विविध दृष्टिकोण आपस में मिलते हैं। और आईएफपी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। नेटफ्लिक्स और यश राज फिल्म्स के साथ मेरी आने वाली सीरीज़ ‘अक्का’ के ज़रिए, मुझे एक अनोखी कहानी का हिस्सा बनने का मौका मिला है एक ऐसी दुनिया, जो दिलचस्प किरदारों और जटिल आपसी संबंधों से बुनी गई है। मैं आईएफपी २०२६ का हिस्सा बनने, उभरती प्रतिभाओं के साथ जुड़ने और कहानी कहने की कला तथा प्रस्तुति पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए उत्सुक हूँ।”
आईएफपी सीजन १६ का हिस्सा बनने को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए हुमा कुरैशी ने कहा, “आईएफपी हमेशा एक ऐसी जगह रही है जो रचनात्मकता को उसके सबसे ईमानदार और रोमांचक रूप में सराहती है। इस फेस्टिवल की जो बात मुझे सबसे अच्छी लगती है, वह है कहानी सुनाने के इर्द-गिर्द पैदा होने वाली ऊर्जा, और कलाकारों को एक साथ लेकर आने, विचारों का आदान-प्रदान करने और एक-दूसरे को प्रेरित करने का अवसर देता है। एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने अभिनय, लेखन और निर्माण के ज़रिए कहानी कहने के अलग-अलग तरीकों को लगातार तलाशा है, मैं वास्तव में उन जगहों की कद्र करती हूँ जो प्रयोग करने और नई आवाज़ों को सामने लाने को बढ़ावा देती हैं। मैं आईएफपी का हिस्सा बनने, युवा और उभरते क्रिएटर्स से मिलने, और क्रिएटिव प्रोसेस, सिनेमा तथा कहानी कहने के ज़रिए खुलने वाली ढेरों संभावनाओं पर सार्थक बातचीत करने के लिए सचमुच बहुत उत्साहित हूँ।”
विभिन्न रचनात्मक आवाजों को एक साथ लाने में आईएफपी की भूमिका के बारे में बात करते हुए, प्रतीक गांधी ने कहा, “आईएफपी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मिलन-स्थल है, जहाँ कहानी कहने, प्रदर्शन और रचनात्मक कार्यों के विविध रूप एक साथ मिलते हैं। इसकी खूबी यह है कि यह अलग-अलग पृष्ठभूमियों से कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाता है, जिससे नई खोज, विचारों के आदान-प्रदान और संवाद को बढ़ावा मिलता है।”
२०११ में ५० घंटे की फिल्म-निर्माण चुनौती के रूप में शुरू हुई यह पहल, आज एक बहु-आयामी रचनात्मक मंच बन गई है, जो दुनिया भर के रचनाकारों को एक साथ लाती है। सोलह सीज़न बीत जाने के बाद भी, इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट (IFP) उन लोगों के लिए एक मिलन स्थल बना हुआ है जो विभिन्न रचनात्मक क्षेत्रों में संस्कृति का निर्माण करते हैं, उसे आकार देते हैं और उसकी नई कल्पना करते हैं। इंडियन फिल्म प्रोजेक्ट (IFP) सीज़न 16 का आयोजन 24 और 25 अक्टूबर, 2026 को मुंबई के महबूब स्टूडियो में होगा।

