एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): “कागज़ पर ‘तस्करी’ एक क्राइम थ्रिलर लगती है, लेकिन स्क्रीन पर यह अपने ही बोझ तले दब जाती है। जो कहानी दिलचस्पी के साथ शुरू होती है, वह जल्द ही बोरिंग हो जाती है, क्योंकि कहानी अनुमानित रास्तों पर चलती है और धीमी गति सारा रोमांच खत्म कर देती है। शुरुआत में थोड़ी सी चमक दिखाने के बाद, सीरीज़ पूरी तरह से अपनी गति खो देती है, और एक नीरस और भुला देने वाला अनुभव छोड़ जाती है।” तस्करी एक ऐसी क्राइम-थ्रिलर सीरीज़ है जो शुरुआत में उम्मीद जगाती है, लेकिन धीरे-धीरे वही उम्मीद बोझ बन जाती है। कमज़ोर कहानी और प्रेडिक्टेबल प्लॉट कहानी में नयापन नहीं है। स्मगलिंग, ईमानदार अफ़सर और सिस्टम से लड़ाई सब कुछ पहले देखा-सुना हुआ लगता है। ज़्यादातर ट्विस्ट पहले से ही अंदाज़ा लगने लगते हैं, जिससे थ्रिल गायब हो जाता है।
एयरपोर्ट कस्टम्स की हाई-स्टेक दुनिया में, समर्पित और उसूलों वाले सुपरिटेंडेंट अर्जुन मीणा (इमरान हाशमी) ऑफिसर्स की एक एलीट टीम को लीड करते हैं, जो इंटरनेशनल क्राइम के खिलाफ देश की पहली डिफेंस लाइन हैं। जब एक ज़रूरी सरकारी निर्देश उन्हें स्मगलिंग में बढ़ोतरी को रोकने का काम देता है, तो मीणा की टीम को आगे बढ़कर एक नेशनल सिक्योरिटी मिशन शुरू करना होता है: कुख्यात किंगपिन बड़ा चौधरी (शरद केलकर) के नेतृत्व वाले एक सोफिस्टिकेटेड ग्लोबल सिंडिकेट को खत्म करना।

जानी-पहचानी कहानी के पॉइंट्स से भरी, ‘टास्करी’ ज़्यादातर अनुमानित दायरे में ही रहती है: हमेशा देखने लायक इमरान हाशमी भी कहानी में फीके पड़ जाते हैं।
सीरीज़ में कई लूपहोल्स हैं, जिनका कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। किरदारों की डेप्थ कमजोर है और उनके फैसले कई बार बेवजह लगते हैं। इमरान हाशमी जैसी दमदार कास्ट होने के बावजूद उनका टैलेंट सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाया।
स्लो स्टोरी, प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट और ढेर सारे लूपहोल्स।
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Taskaree Review (Hindi | Dainik Savera Times)
Taskaree में इमरान हाशमी जैसे बड़े नाम की मौजूदगी के बावजूद सीरीज़ पर कोई खास असर नहीं पड़ता। इसमें कोई शक नहीं कि इमरान हाशमी ने अपने किरदार में जान डालने की पूरी कोशिश की है और मेहनत साफ दिखाई देती है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट राइटिंग के कारण उनका अभिनय भी असर छोड़ने में असफल रहता है। कई सीन में यह साफ महसूस होता है कि कहानी उनका साथ नहीं दे रही।
सीरीज़ कई जगह आपको इमरान हाशमी की पिछली फिल्म Selfiee की याद दिलाती है, जहां अच्छे अभिनेता के बावजूद कंटेंट कमजोर साबित हुआ था। बाकी सहायक कलाकारों की बात करें तो ऐसा लगता है कि उन्हें भी अंदाज़ा हो गया था कि पूरी सीरीज़ का फोकस सिर्फ इमरान हाशमी के किरदार को मजबूत दिखाने पर है — या कहें, एक जबरदस्ती की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, Taskaree एक ऐसी वेब सीरीज़ बनकर रह जाती है जो दर्शक को बांधने में नाकाम रहती है। कहीं यह आपको बोर करती है, तो कहीं नींद आने का एहसास देती है। इसे देखना या छोड़ना पूरी तरह आपके मूड पर निर्भर करता है।
Dainik Savera Times News Media Network की ओर से इस वेब सीरीज़ को 2 स्टार ⭐⭐ की रेटिंग दी जाती है।
कलाकार: इमरान हाशमी, शरद केलकर, अमृता खानविलकर, नंदीश संधू, अनुराग सिन्हा, जमील खान और अन्य
निर्माता: नीरज पांडे
निर्देशक: राघव जयरथ, नीरज पांडे
स्ट्रीमिंग चालू: नेटफ्लिक्स
भाषा: हिन्दी
रनटाइम: 50 मिनट के 7 एपिसोड