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फिल्म अब दिल्ली दूर नहीं बारह मई को देश भर के सिनेमा घरों में होगी प्रदर्शित

जयपुर: युवाओं के संघर्ष पर आधारित रियल लाइफ बेस्ड फिल्म अब दिल्ली दूर नहीं 12 मई को सिनेमा घरों में प्रदर्शित होगी। फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले कलाकार इमरान जाहिद और चाणक्य आईएएस एकेडमी के चेयरमैन और इस फ़ल्मि के सूत्रधार सक्सेज गुरु ए के मिश्र मीडिया और चाणक्य एकेडमी के विद्यार्थियों से आज यहां रुबरु हुए । इस अवसर पर मिश्र ने बताया कि फिल्म अब दिल्ली दूर नहीं एक इमोशनल-ड्रामा फिल्म है, जो एक मोटिवेशनल कहानी पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग दिल्ली के मुखर्जी नगर, दिल्ली विश्वविद्यालय, चाणक्य आईएएस एकेडमी के दिल्ली के सभी शाखाओं में, कमलानगर, राजेंद्रनगर, कनॉटप्लेस, तिहाड़जेल और गो¨वदपुरी पुलिस स्टेशन जैसी जगहों पर की गई है। फिल्म के कुछ हिस्सों को नोएडा में भी फिल्माया गया है। इस फिल्म का निर्माण शाइनिंग सन स्टूडियो के विनय भारद्वाज और संजय मवार ने किया है। इस फिल्म की कहानी दिनेश गौतम ने लिखी है और निर्देशन कमल चंद्रा ने किया है।

फिल्म एक रिक्शा चालक के बेटे की कहानी से प्रेरित है, जिसका नाम गो¨वद जायसवाल है। गो¨वद का चयन सिविल सेवा परीक्षा 2007 में बतौर आईएएस के रुप में हो चुका है। उस समय देश भर में इसकी काफी चर्चा भी हुई थी। अभिनेता इमरान जाहिद ने कहा कि इस फिल्म के जरिए श्री मिश्र के लंबे अनुभव को भी साझा किया गया है, जो फिल्म को और भी खास बना देता है। मिश्र के अनुसार यह फिल्म ऐसे तमाम युवाओं की कहानी को जोड़ पाएगी, जो एक छोटे से इलाके से जाकर दिल्ली जैसे महानगर में संघर्ष करता है और अपनी मंजिल हासिल करता है।

उन्होंने बताया कि यह फिल्म साबित करती है कि हमारी नियति तय करने की क्षमता सितारों में नहीं बल्कि खुद में होती है। इसलिए इस फिल्म को लेकर यह कहा जा सकता है कि यह फिल्म मेहनतकश युवाओं के संघर्ष से लेकर सफलता हासिल करने तक की कहानी है। इस फिल्म की खासियत है कि फिल्म का कॉस्टयूम तिहाड़ जेल के कैदियों ने डिजाइनर विक्की सिंह के देखरेख में तैयार की है वहीं फिल्म इंडस्ट्री के वर्तमान दौर में जब सुपर हीरो की खूब तारीफ होती है और एक आम इंसान को नजरअंदाज कर दिया जाता है, तो ऐसे में इस फिल्म की कहानी बताती है कि किस तरह एक साधारण गांव का लड़का पूरे समाज को कैसे चौंका जाता है। वह समाज की सोंच को ही बदल देता है। वह साबित करता है कि कैसे विफलता और अपमान से भरी जिंदगी में भी संघर्ष के रास्ते मंजिल के शिखर पर पहुंचा जा सकता है।

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