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‘National Handloom Day’ पर Vidya Balan का खास संदेश- “हर सिल्क साड़ी में छिपी है एक अनोखी कहानी”

Vidya Balan's message on National Handloom Day

Vidya Balan's message on National Handloom Day

एंटरटेनमेंट डेस्क: भारतीय हथकरघा और पारंपरिक परिधानों की सबसे मजबूत समर्थक विद्या बालन ने एक बार फिर ‘नेशनल हैंडलूम डे’ के अवसर पर देश की समृद्ध बुनाई परंपरा और कारीगरों को सम्मान देते हुए अपने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया है।

अपनी साड़ियों के चयन और सार्वजनिक आयोजनों में भारतीय हैंडलूम को लगातार बढ़ावा देने वाली अभिनेत्री ने इस खास मौके पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए हैंडलूम सिल्क साड़ियों की खूबसूरती, विरासत और उन्हें बनाने वाले बुनकरों की मेहनत को सलाम किया है। इसी के साथ उन्होंने लोगों से असली भारतीय हैंडलूम को अपनाने और उसका समर्थन करने की भी अपील की है।

पोस्ट के कैप्शन में विद्या बालन ने लिखा है, “हर हैंडलूम सिल्क साड़ी अपनी एक ऐसी कहानी कहती है, जिसे कोई मशीन कभी दोहरा नहीं सकती। तो इस ‘नेशनल हैंडलूम डे’ पर आइए उन अद्भुत कारीगरों का सम्मान करें, जिनके हाथों ने भारत की कालातीत बुनाई परंपराओं को जीवित रखा है। हाँ, ख्याल रखें कि जब भी आप शुद्ध रेशम खरीदें, हमेशा ‘सिल्क मार्क’ अवश्य देखें, क्योंकि यही असली शुद्ध रेशम की पहचान है।”

वीडियो में विद्या ने हैंडलूम सिल्क साड़ियों की खासियत बताते हुए यह भी कहा है, “मुझे हैंडलूम सिल्क साड़ियों की सबसे खूबसूरत बात यह लगती है कि इसका हर धागा, हर मोटिफ और हर छोटी-सी बारीकी कलाकारों की मेहनत और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा की पहचान होती है। यही वजह है कि हर हैंडलूम सिल्क साड़ी अपने आप में बिल्कुल अनोखी होती है।”

गौरतलब है कि भारतीय परिधान परंपरा की सशक्त पैरोकार विद्या बालन का यह संदेश न केवल सदियों पुरानी बुनाई कला को संरक्षित और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देता है, बल्कि उन लाखों बुनकरों और कारीगरों के समर्पण को भी सम्मान दे रहा है, जिनकी मेहनत से भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत आज भी जीवित है। इसी के साथ लोगों से असली हैंडलूम सिल्क चुनने और ‘सिल्क मार्क’ लेबल देखने की अपील कर उन्होंने भारतीय हथकरघा उद्योग और पारंपरिक शिल्प को समर्थन देने का संदेश भी दिया है।

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