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पर्दे का खलनायक: राणा की एक्टिंग का अलग ही जलवा

पर्दे का खलनायक: राणा की एक्टिंग का अलग ही जलवा

पर्दे का खलनायक: राणा की एक्टिंग का अलग ही जलवा

मुंबई: अभिनेता आशुतोष राणा को उनकी भयानक आंखों, डरावनी हंसी और कड़क आवाज़ के लिए हिंदी फिल्मों में खलनायक के रूप में जाना जाता है। पर्दे पर जितने डरावने, असल जिंदगी में उतने ही शांत, विनम्र और आध्यात्मिक स्वभाव के हैं। उनका जन्म 10 नवंबर 1967 को मध्य प्रदेश के गाडरवारा में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज और लगनशील थे। शुरुआत में उनका सपना राजनीति में करियर बनाने का था, लेकिन थिएटर और अभिनय की दुनिया ने उनका रास्ता बदल दिया।

कॉलेज के समय वे छात्र राजनीति में सक्रिय थे और इसी दौरान थिएटर से जुड़े। धीरे-धीरे उनका झुकाव अभिनय की ओर बढ़ा। बाद में उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से प्रशिक्षण लिया। साल 1995 में टीवी सीरियल ‘स्वाभिमान’ से उन्होंने करियर की शुरुआत की। इसके बाद ‘फर्ज’, ‘साजिश’, ‘वारिस’ और ‘काली-एक अग्निपरीक्षा’ जैसे सीरियल्स में नजर आए।

फिल्मों में उनकी पहली बड़ी पहचान 1998 में आई ‘दुश्मन’ से मिली, जिसमें उन्होंने साइको किलर गोकुल पंडित का किरदार निभाया। इसके बाद 1999 में फिल्म ‘संघर्ष’ में लज्जा शंकर पांडे के रोल ने उनकी खलनायक की छवि को और मजबूत किया। दोनों फिल्मों के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट विलेन मिला।

आशुतोष राणा महादेव के भक्त हैं और नियमित ध्यान करते हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी यादगार अभिनय किया है। ‘राज’, ‘हासिल’, ‘आवरापन’, ‘मुल्क’, ‘सोनचिरैया’, ‘पठान’ और ‘छावा’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार दर्शकों के दिल में बसे हैं।

सिर्फ अभिनेता नहीं, राणा लेखक और विचारक भी हैं। उन्होंने ‘मौन मुस्कान की मार’ और ‘रामराज’ जैसी किताबें लिखी हैं। उनके अभिनय को कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें स्क्रीन अवॉर्ड, जी सिने अवॉर्ड और फिल्मफेयर शामिल हैं। 2021 में उन्हें फिल्म ‘पगलैट’ में पिता का रोल निभाने के लिए फिल्मफेयर ओटीटी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

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