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फिल्मी दुनिया में नए अंदाज की दस्तक: Waterfront Indie Film Festival का धमाकेदार समापन

एंटरटेनमेंट डेस्क: वॉटरफ्रंट इंडी फिल्म फेस्टिवल (WIFF) के पहले संस्करण का हाल ही में सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस फेस्टिवल ने स्वतंत्र सिनेमा का शानदार जश्न मनाया, जिसमें मास्टरक्लास, सेलिब्रिटी पैनल, वर्कशॉप्स और फिल्म स्क्रीनिंग्स जैसी रोचक गतिविधियाँ शामिल थीं। इस मौके पर फिल्म प्रेमी, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और स्वतंत्र फिल्मकार एक साथ आए और सिनेमा के प्रति अपने विचार और अनुभव साझा किए।

फेस्टिवल की सबसे चर्चित गतिविधियों में से एक रही “एक्टर्स पैनल डिस्कशन”, जिसे Applause Entertainment ने प्रस्तुत किया। इस सत्र में प्रसिद्ध कलाकारों – प्रतीक गांधी, प्रिया बापट, अमित सियाल, सुरवीन चावला और श्वेता बसु प्रसाद – ने हिस्सा लिया। इस चर्चा में भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य में अभिनेताओं द्वारा झेली जाने वाली चुनौतियों पर विस्तार से बातचीत हुई।

प्रतीक गांधी ने क्षेत्रीय लहजे को लेकर एक अहम बात कही,

“जिन अभिनेताओं का गुजराती या मराठी लहजा होता है, उन्हें अक्सर मुख्यधारा के किरदारों के लिए नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि पंजाबी या बिहारी लहजे वाले कलाकारों को अधिक मौके मिलते हैं।

अभिनेता अमित सियाल ने निर्देशक की भूमिका पर जोर देते हुए कहा,

जब कोई फिल्म सफल होती है, तो उसका श्रेय निर्देशक को जाता है, और जब असफल होती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी निर्देशक की होती है।” अभिनेत्री प्रिया बापट ने मराठी फिल्म ‘सबर बॉन्ड’ की सफलता पर गर्व व्यक्त किया और दर्शकों से इस फिल्म की टीम के लिए तालियाँ बजाने की अपील की।

फेस्टिवल में कई प्रेरणादायक मास्टरक्लास और फिल्म स्क्रीनिंग्स भी आयोजित की गईं। दिग्गज फिल्मकार राहुल रवैल के साथ एक विशेष Filmmaking Adda Session रखा गया, जिसमें उन्होंने सिनेमा के प्रति अपने अनुभव और विचार साझा किए। इसके अलावा, ‘P for Paparazzi’ की एक्सक्लूसिव स्क्रीनिंग भी हुई, जिसके बाद निर्देशक दिव्या खारनारे और सेलिब्रिटी फोटोग्राफर मनोज़ महारा के साथ रोचक बातचीत ने दर्शकों को पपराज़ी की दुनिया की झलक दिखाई। फेस्टिवल में डॉक्युमेंट्री और एक्सपेरिमेंटल फिल्म्स, फिक्शन शॉर्ट फिल्म्स, फिक्शन फीचर फिल्म्स, और सोशल इश्यू पर आधारित सर्वश्रेष्ठ फिल्म जैसी कई कैटेगरी में अवॉर्ड्स दिए गए, ताकि स्वतंत्र सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित किया जा सके।

फेस्टिवल की सह-संस्थापक दीपा गहलोत ने कहा,
WIFF वाकई विविध कहानियों और फिल्मों का उत्सव था।

सह-संस्थापक विंटा नंदा ने बताया —

“दर्शकों का रिस्पॉन्स हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा शानदार रहा। हमें खुशी है कि इंडिपेंडेंट सिनेमा को इतना प्यार और सराहना मिली। फेस्टिवल के क्यूरेटर श्रीधर रंगायन ने कहा , हमारा उद्देश्य ऐसी फिल्में दिखाना था जो सोचने पर मजबूर करें और रूढ़िवादिता को चुनौती दें। WIFF के ज़रिए हमने यह मकसद पूरा किया।

तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज़ (TRIS) के सहयोग से आयोजित यह फेस्टिवल शानदार अंदाज में संपन्न हुआ, जिसने दर्शकों को इसके अगले संस्करण का बेसब्री से इंतजार करवाया।

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