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Toxic Movie Review: यश का सुनामी जैसा कमबैक और गीतू मोहनदास का मास्टरक्लास! क्यों हर हाल में देखनी चाहिए ‘Toxic’

'Toxic' Movie Review

'Toxic' Movie Review

एंटरटेनमेंट डेस्क(फरीद शेख): तीन साल का लंबा इंतज़ार और जब रॉकिंग स्टार यश परदे पर लौटते हैं, तो सिर्फ धमाका नहीं करते बल्कि पूरे थियेटर को हिलाकर रख देते हैं! ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ सिर्फ एक आम एक्शन फिल्म नहीं है, बल्कि यह पावर, बगावत, खतरनाक अंडरवर्ल्ड और दिल को छू लेने वाले जज़्बातों का ऐसा बवंडर है जो आपको पहले फ्रेम से लेकर आखिरी सेकंड तक सीट से बांधे रखता है।

यह फिल्म आपको थिएटर तक क्यों खींच लाएगी? इसके 5 बड़े कारण है-

1) यश का डबल धमाका: राया का खौफ और टिकट की सनक

यश ने यहाँ दो अलग-अलग पीढ़ियों को दो अलग-अलग तेवरों के साथ जिया है। राया के किरदार में उनका ऐसा खौफनाक ठहराव है कि बिना बोले सिर्फ उनकी आँखों से दहशत पैदा होती है। वहीं उनके बेटे टिकट के रूप में यश एक बेकाबू, खतरनाक और हाई-एनर्जी तूफान बनकर आते हैं जो सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक सीटियां बजाने पर मजबूर कर देगा!

2) सभी एक्टर्स और किरदार सिर्फ शो-पीस नही बल्कि हर किरदार कहानी की धड़कन है

यहाँ कोई भी किरदार सिर्फ टाइमपास के लिए नहीं है:

नयनतारा (गंगा): पूरे ड्रामे को एक बेहद मजबूत और इमोशनल आधार देती हैं।

कियारा आडवाणी (नादिया): इस खूनी और बेरहम माहौल में प्यार, मासूमियत और दिल छू लेने वाला दर्द लेकर आती हैं।

हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ): अपनी ठसक और जबरदस्त डायलॉग्स से पूरी स्क्रीन पर छा जाती हैं।

रुक्मिणी वसंत (मेलिसा): फिल्म का सबसे बड़ा छुपा रुस्तम! उनका सादगी भरा अंदाज दिल जीत लेता है।

तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, सुदेव नायर और डैरेल डी’सिल्वा: सभी ने इस अंडरवर्ल्ड को इतना असली और खूंखार बना दिया है कि हर सीन भारी लगता है।

3) धीमी आंच पर पकता पहला हाफ और होश उड़ा देने वाला इंटरवल

गीतू मोहनदास ने जल्दबाज़ी में सीन नहीं काटे हैं। पहला हाफ शतरंज के खेल जैसा है जहाँ सत्ता, परिवार और वफादारी के मोहरे सजाए जाते हैं। फिर आता है इंटरवल ब्लॉक—एक ऐसा सीन जो थिएटर में हर किसी के रोंगटे खड़े कर देगा और आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि कहानी अब कहाँ जाएगी!

4) सेकंड हाफ: स्क्रीन फाड़ देने वाला रॉ और वाइल्ड एक्शन!

इंटरवल के बाद फिल्म सीधा पांचवें गियर में दौड़ती है। यहाँ एक्शन सिर्फ मारधाड़ नहीं, बल्कि बेहद निजी और आक्रामक (प्राइमल) जंग बन जाता है। बैकग्राउंड स्कोर और कैमरावर्क मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि थिएटर का साउंड सिस्टम कांप उठता है।

5) एक ऐसा क्लाइमैक्स जो आसान फॉर्मूले पर नहीं चलता

जब आपको लगेगा कि आपने पूरी कहानी भांप ली है, तभी फिल्म ऐसा अनपेक्षित और जोरदार मोड़ लेती है जो थिएटर से बाहर आने के बाद भी आपके दिमाग से नहीं उतरेगा।

टिकट तुरंत क्यों बुक करें?

Toxic उन बेहद दुर्लभ फिल्मों में से है जहाँ जबरदस्त सीटीमार मास मोमेंट्स भी मिलते हैं और दिल को झकझोर देने वाली गहरी कहानी भी। यश का जलवा, गीतू मोहनदास का विज़न और इस फिल्म का भव्य पैमाना इसे एक अनछुआ थिएट्रिकल अनुभव बनाते हैं।

पॉपकॉर्न का बड़ा टब उठाइए और इसे बड़े पर्दे पर देखिए यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ सिनेमाघरों के लिए बनी है।

स्टारकास्ट: यश, नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत, तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय

डायरेक्शन: गीतू मोहनदास

जॉनर: मास एक्शन / गैंगस्टर ड्रामा / हाई-वोल्टेज थ्रिलर

रेटिंग: ️️️️ (4/5)

कहाँ देखें: सीधे सिनेमाघरों में (बेहतर होगा IMAX या सबसे बड़े स्क्रीन पर)

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