इंटरनेशनल डेस्क: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) अपनी स्थापना की 105वीं वर्षगांठ मना रही है। पार्टी का यह सफर केवल एक राजनीतिक इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता से लेकर आधुनिकीकरण तक की एक अभूतपूर्व यात्रा है। आज जब वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल मची है, तब CPC का सतत शासन, रणनीतिक दृढ़ता और नीतिगत निरंतरता न केवल चीन के लिए बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है। आइए जानते हैं कि आखिर इस सफलता के पीछे क्या तर्क और अनुभव हैं, और वैश्विक दक्षिण के देश इससे क्या प्रेरणा ले सकते हैं।
इस वर्ष अप्रैल में मुझे चीन जाने का मौका मिला और इस यात्रा के दौरान मैंने चीन को कुछ हद तक समझने की कोशिश भी की, मगर मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आज के चीन को समझने के लिए हमें चीन के इतिहास को समझना होगा ताकि हम अपने पड़ोसी को बेहतर तरीक़े से समझ सकें। इसी दौर में मैंने चीन में पार्टी संग्रहालय और शिनजियांग में एक पार्टी स्कूल का दौरा भी किया जिससे मुझे चीन और CPC को समझने में मदद मिली और मैं समझ पाया कि CPC का इतिहास बहुत गौरवपूर्ण है।
मैंने वहाँ समझा कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत में चीन गरीबी, विदेशी हस्तक्षेप और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था। CPC के नेतृत्व में चीन ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता हासिल की और फिर अपनी परिस्थितियों के अनुरूप विकास का मार्ग चुना। इस प्रक्रिया में चीन ने किसी तैयार मॉडल की नकल नहीं की, बल्कि अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर आधुनिकीकरण का एक विशिष्ट मार्ग विकसित किया।
यह अनुभव वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है कि आधुनिकीकरण का कोई एक सार्वभौमिक मॉडल नहीं होता। प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों, विकास आवश्यकताओं और जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप विकास का मार्ग तलाशना चाहिए। चीन की सफलता यह दर्शाती है कि स्वतंत्र नीति-निर्माण, दीर्घकालिक योजना और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देकर विकास के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।
जनता-केंद्रित शासन: चीनी दृष्टिकोण की मूल भावना
सीपीसी के शासन दर्शन का मूल सिद्धांत है “जनता की सेवा करना”। चीन की विकास नीतियों का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार, गरीबी उन्मूलन और साझा समृद्धि को बढ़ावा देना रहा है। पिछले दशकों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालना इसी सोच का परिणाम है। इसके साथ ही “कड़ी मेहनत से राष्ट्र निर्माण” का विचार भी चीनी शासन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बुनियादी ढांचे, औद्योगिक विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा के क्षेत्र में चीन की उपलब्धियां दीर्घकालिक परिश्रम, अनुशासित नीति-क्रियान्वयन और राष्ट्रीय विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए यह अनुभव संकेत देता है कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि जनता के कल्याण, सामाजिक स्थिरता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। ग्लोबल साउथ के देश अक्स्र भ्रष्टाचार, असमानता और संसाधनों के दुरुपयोग से जूझते हैं। चीन का ‘सेवा-प्रथम’ दृष्टिकोण उन्हें एक विकल्प देता है: सत्ता जब जनता के प्रति जवाबदेह होती है, तो विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है।
‘पंचवर्षीय योजना + दीर्घकालिक दृष्टिकोण’ मॉडल: स्थिरता का वैश्विक मूल्य
चीन की सबसे बड़ी विशेषता है इसकी नीतिगत निरंतरता। पश्चिमी लोकतंत्रों में सरकार बदलने पर नीतियां बदल जाती हैं, लेकिन चीन में पंचवर्षीय योजनाओं का सिलसिला दशकों से चला आ रहा है। अब ‘15वीं पंचवर्षीय योजना’ की नई यात्रा शुरू हो चुकी है, जो उच्च-गुणवत्ता वाले विकास, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और नए ऊर्जा स्रोतों पर केंद्रित है।
चीन की पंचवर्षीय योजनाओं ने आर्थिक विकास, औद्योगिक उन्नयन, तकनीकी नवाचार, हरित विकास और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट दिशा प्रदान की है। साथ ही, 2035 और उससे आगे के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाई गई दीर्घकालिक योजनाएं नीति निरंतरता सुनिश्चित करती हैं। आज जब कई देशों में राजनीतिक परिवर्तन के साथ विकास नीतियों में अस्थिरता देखी जाती है, तब चीन का यह मॉडल वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता और पूर्वानुमेयता प्रदान करता है। विदेशी निवेश, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यह एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक है। यह केवल चीन के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी नए अवसर लेकर आ रहा है। हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा निर्माण, औद्योगिक सहयोग और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
‘मानव जाति के साझा भविष्य’ की अवधारणा और वैश्विक दृष्टिकोण
अभूतपूर्व परिवर्तनों और उथल-पुथल से भरी दुनिया में, सीपीसी का वैश्विक दृष्टिकोण अत्यंत व्यावहारिक और महत्वपूर्ण है। ‘मानव जाति के साझा भविष्य का निर्माण‘ और चीन द्वारा प्रस्तावित चार प्रमुख वैश्विक पहलें वैश्विक विकास पहल (GDI), वैश्विक सुरक्षा पहल (GSI), वैश्विक सभ्यता पहल (GCI), और वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन पहल (GAIGI)—आज के विभाजित विश्व में शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए एक रोडमैप प्रदान करती हैं। ग्लोबल साउथ के लिए, सीपीसी की दूरदर्शी सोच एकजुटता और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में अधिक न्यायसंगत और संतुलित भागीदारी प्राप्त कर सकें।
इसी सोच के आधार पर चीन ने चार प्रमुख वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है—
- वैश्विक विकास पहल
- वैश्विक सुरक्षा पहल
- वैश्विक सभ्यता पहल
- वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग पहल
इन पहलों का उद्देश्य विकास के अंतर को कम करना, साझा सुरक्षा को बढ़ावा देना, विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद को मजबूत करना और नई प्रौद्योगिकियों के लाभों को व्यापक रूप से साझा करना है।
ग्लोबल साउथ के लिए आधुनिकीकरण का नया मार्ग
राष्ट्रीय स्वतंत्रता और आधुनिकीकरण के लिए CPC का संघर्ष और अभ्यास ग्लोबल साउथ के देशों को अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास पथ चुनने की प्रेरणा देता है। चीन ने पश्चिम के ‘आधुनिकीकरण का मतलब पश्चिमीकरण है‘ के पारंपरिक मिथक को तोड़ा है। सीपीसी ने साबित किया है कि विकासशील देश बिना अपनी सांस्कृतिक पहचान और संप्रभुता का त्याग किए, अपने दम पर आधुनिक राष्ट्र बन सकते हैं। ग्लोबल साउथ के लिए, चीनी अनुभव यह सिखाता है कि आर्थिक विकास, स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखते हुए एक समावेशी और स्वतंत्र आधुनिकीकरण मार्ग का निर्माण कैसे किया जाए।
105 वर्षों की यात्रा के बाद भी CPC स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और नए विकास लक्ष्यों की ओर अग्रसर करने का प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय विकास, दीर्घकालिक रणनीतिक योजना, जनता-केंद्रित शासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की इसकी अवधारणाएं आज के जटिल वैश्विक परिदृश्य में विशेष महत्व रखती हैं। वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए चीन का अनुभव यह संदेश देता है कि स्वतंत्र विकास मार्ग, राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ सतत प्रयास विकास की मजबूत नींव बन सकते हैं।दुनिया में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, चीन की स्थिरता, नीति निरंतरता और सहयोग पर आधारित दृष्टिकोण न केवल उसके अपने विकास को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी नए अवसरों, नई साझेदारियों और साझा समृद्धि के नए द्वार खोल रहा है। ग्लोबल साउथ, अब समय है अपनी राह खुद बनाने का और इस राह में चीन एक भरोसेमंद साथी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

