11 जुलाई को 15वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के विदेश मंत्रियों की बैठक कुआलालंपुर में आयोजित हुई। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इसमें भाग लिया और भाषण दिया।
वांग यी ने कहा कि इस वर्ष पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है। सभी पक्षों को इस अवसर का लाभ उठाकर आपसी समझ और विश्वास बढ़ाना, शांति और स्थिरता बनाए रखना तथा विकास और समृद्धि को बढ़ावा देना चाहिए।
वांग यी ने बताया कि चीन ने तीन सुझाव दिए। पहला, बातचीत की ओर लौटना। शिखर सम्मेलन का मूल उद्देश्य रचनात्मक संवाद करना और रणनीतिक आपसी विश्वास को बढ़ाना है। हालाँकि, क्षेत्र के बाहर के कुछ देश हाल के वर्षों में इस रास्ते से भटक गए हैं और उन्होंने शिखर सम्मेलन के मंच का उपयोग हुए मतभेदों को बढ़ावा देने, अन्य देशों पर हमला करने और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए किया है। आशा है कि सभी पक्ष एक-दूसरे का सम्मान करेंगे, सद्भावना से संवाद करेंगे और समझ व सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
दूसरा, विकास की ओर लौटना। हमें विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो सबसे बड़ा साझा कारक है, और व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से पूर्वी एशिया के लोगों को एक अच्छा जीवन जीने में सक्षम बनाने का प्रयास करना चाहिए। एकतरफावाद और संरक्षणवाद अदूरदर्शी और खतरनाक हैं। सभी पक्षों के लिए सबसे अच्छा विकल्प सहयोग के दायरे का विस्तार करना और विकास के लाभों को साझा करना है।
तीसरा, खुलेपन की ओर लौटना। पूर्वी एशियाई सहयोग का लाभकारी अनुभव खुले क्षेत्रवाद का अभ्यास करना है। हम आसियान के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय सहयोग ढांचे का समर्थन करते हैं, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की दृढ़ता से रक्षा करते हैं, एक उच्च-स्तरीय क्षेत्रीय मुक्त व्यापार नेटवर्क का निर्माण करते हैं और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा देते हैं।
वांग यी ने ज़ोर देकर कहा कि थाइवान जलडमरूमध्य में तनावपूर्ण स्थिति का मूल कारण “थाइवान स्वतंत्रता” की बढ़ती अलगाववादी गतिविधियाँ और बाहरी ताकतों की मिलीभगत और समर्थन है। अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना प्रत्येक देश का पवित्र मिशन है। हम आशा करते हैं कि सभी देश एक-चीन सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करते रहेंगे, “थाइवान स्वतंत्रता” के किसी भी रूप का विरोध करेंगे और चीन के एकीकरण के महान उद्देश्य का समर्थन करेंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

