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पेइचिंग में 2025 ग्लोबल महिला शिखर सम्मेलन: 30 वर्ष बाद एक बड़े संकल्प की ओर

चीन इस वर्ष दूसरी बार एक अत्यंत महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जो 1995 में पेइचिंग में हुए विश्व महिला सम्मेलन के बाद देश में आयोजित दूसरी बड़ी महिला मामलों की सभा होगी। यह सम्मेलन, जिसे कभी–कभी “2025 ग्लोबल महिला शिखर सम्मेलन” या “Beijing + 30” शिखर सम्मेलन कहा जा रहा है, 1995 की पेइचिंग घोषणा और कार्रवाई रूपरेखा की 30वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया जाना है। 1995 में पेइचिंग में आयोजित चौथा विश्व महिला सम्मेलन एक मील का पत्थर माना जाता है। उस समय 189 देशों ने भाग लिया और पेइचिंग घोषणा और कार्रवाई रूपरेखा नामक दस्तावेज पर सहमति व्यक्त की गई, जिसे आज भी लैंगिक समानता की सबसे व्यापक घोषणाओं में से एक माना जाता है।

उस सम्मेलन में दुनिया भर की सरकारों ने महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने और उनके राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को मजबूत करने का संकल्प लिया था। 2025 का यह शिखर सम्मेलन उसी संकल्प की 30वीं वर्षगांठ के आसपास आयोजित किया जा रहा है, जिससे इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। पिछले तीन दशकों में महिलाओं के अधिकारों और समानता के क्षेत्रों में कई प्रगति हुई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बाधाएं और प्रतिगमन भी देखने को मिला है।

नए युग की चुनौतियों पर होगी चर्चा
जानकारों के मुताबिक, इस सम्मेलन में डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लैंगिक अंतर, जलवायु परिवर्तन का महिलाओं पर प्रभाव, और कोविड-19 महामारी के बाद की दुनिया में आर्थिक सशक्तिकरण जैसे समकालीन मुद्दे मुख्य एजेंडे में शामिल होंगे। दुनिया भर से नेता, महिला अधिकार कार्यकर्ता, शोधकर्ता और एनजीओ प्रतिनिधि इन विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे और एक साझा रणनीति बनाने का प्रयास करेंगे। चीन ने इस आयोजन की तैयारियों को लेकर पहले ही एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर लिया है। उम्मीद की जा रही है कि यह शिखर सम्मेलन महिला सशक्तिकरण की वैश्विक बहस को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा, और एक अधिक समावेशी और न्यायसंगत विश्व के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

सम्मेलन से निम्न प्रकार की घोषणाएँ और पहल अपेक्षित हैं
Beijing +30 Action Agenda / नई रूपरेखा एक अद्यतन घोषणा-पत्र जिसमें 1995 की बीजिंग घोषणा की समीक्षा करते हुए आज की नई चुनौतियों (डिजिटल असमानता, AI बायस, डेटा न्याय, लैंगिक हिंसा नेटवर्क, जलवायु संकट एवं विस्थापन आदि) को शामिल किया जाए। भारत के दृष्टिकोण से इस सम्मेलन का महत्व: भारत न केवल इस सम्मेलन में भाग ले सकता है बल्कि उसमें सक्रिय भूमिका भी निभा सकता है — प्रस्ताव पेश करना, साझेदारी प्रस्ताव देना, भाषण देना, और एक मजबूत नागरिक समाज प्रतिनिधि दल भेजना। इसके माध्यम से भारत वैश्विक महिला न्याय और समानता की बहस में अपनी आवाज़ और अनुभव साझा कर सकता है। यह भारत को अन्य विकासशील देशों और दक्षिण एशियाई देशों के बीच नेतृत्व भूमिका निभाने का अवसर देगा।

भारत की चुनौतियाँ और अपेक्षाएँ
भारत में लैंगिक असमानताएँ अभी भी गंभीर हैं, समान काम के लिए समान वेतन, महिलाओं का सार्वजनिक जीवन में प्रतिनिधित्व, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा आदि ये विषय प्रमुख संवाद होंगे। भारत की विविधता (भाषा, संस्कृति, जाति, धर्म, आर्थिक स्तर) के कारण नीति प्रस्तावों को अधिक समावेशी और संदर्भ-सूचक बनाना आवश्यक होगा। भारतीय पुरुष और सामाजिक ताने-बाने की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी अर्थात् बदलाव सिर्फ महिलाओं की भागीदारी से नहीं, पूरे समाज की सोच में परिवर्तन से संभव है। सहभागिता सिर्फ शिखर सम्मेलन में भागीदारी से नहीं, बल्कि दीर्घकालीन नीति प्रतिबद्धताओं और संसाधन आवंटन से होनी चाहिए।

संभावित विषय जहाँ भारत अनुभव साझा कर सकता है जैसे डिजिटल India, महिलाओं की डिजिटलीकरण भागीदारी, ग्रामीण महिलाओं का ऑनलाइन सशक्तिकरण, स्व-रोजगार, मुद्रा योजनाएँ, महिला उद्यमिता — भारत में महिलाओं के स्वरोजगार/माइक्रोफाइनेंस अनुभव, लैंगिक हिंसा/उत्पीड़न खिलाफ कानून, मोबाइल हेल्पलाइन सेवा, पुलिस सुधार, शिक्षा व स्वास्थ्य नीति, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, सामाजिक अभियान — जैसे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’और सुरक्षा कार्यक्रम आशा है कि इस वर्ष का कार्यक्रम नए कीर्तिमान स्थापित करेगा और विश्व में महिलाओं के योगदान को बढ़ाने में योगदान देगा तथा महिलाओं को सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए प्रेरित करेगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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