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पंचशील समझौते की 70वीं वर्षगांठ– विश्व शांति के लिए भारत-चीन संबंध मधुर होना जरूरी

भारत और चीन के आपसी रिश्तों के लिहाज से २९ अप्रैल का दिन अहम माना जाता है, क्योंकि ७० साल पहले इसी दिन दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था, जिसे ‘पंचशील समझौता’ भी कहा जाता है। जिसमें ५ जरूरी सिद्धांत बनाए गए थे, जो भारत और चीन के व्यापार, विदेश नीति, विकास के प्रयासों में अहम माने गए थे। यही वजह है कि आज भी दोनों देशों के बीच यह समझौता बेहद अहम माना जाता है। बीते ७० सालों में भारत और चीन में कई अहम बदलाव हुए। दोनों देश आर्थिक, व्यापारिक और विकास के मामलों में तेजी से आगे बढ़े हैं, जिससे न केवल एशिया महाद्वीप में बल्कि पूरी दुनिया में इंडिया और चीन का रुतबा बढ़ा है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंधों पर दुनिया की नजर रहती है। पिछले ७० सालों में दोनों देशों ने एक दूसरे के संबंधों को लेकर कई अहम कदम भी उठाए हैं। वर्तमान में भी स्थितियां सामान्य बनाने की पहल जारी है। ऐसे में पंचशील समझौते की ७०वीं वर्षगांठ पर कुछ बातें जानना जरूरी हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक सभा में कहा था कि दोनों (भारत-चीन) के बीच स्थिर और शांतिपूर्ण संबंधों को लेकर द्विपक्षीय बातचीत जरूरी है, जबकि २०२३ में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी कहा था कि दोनों देशों के बीच शांति से ही रिश्ते बेहतर होंगे। इसके अलावा कुछ दिन पहले चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने भी यह माना था कि भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में जोड़ होना जरूरी है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी अलग-अलग मंचों पर बातचीत होती रहती है। विदेश मामलों के जानकार भी यह मानते हैं कि विश्व शांति के लिए भारत और चीन के बीच संबंध मधुर होना जरूरी है। इसलिए रणनीतिक धैर्य दिखाना चाहिए, क्योंकि दोनों एक दूसरे के अहम पड़ोसी देश हैं। जिससे यह तो तय है कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से एक-दूसरे से बातचीत करते हैं. यानि समय-समय पर दोनों देशों के बीच बातचीत रहना अच्छे संकेत माने जा सकते हैं। आज के वक्त में भी इन मामलों में पंचशील के समझौते को नकारा नहीं जा सकता।

पंचशील समझौते के पांच सिद्धांत इस प्रकार सूचीबद्ध हैं:
(1) एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना
(2) एक दूसरे के विरुद्ध आक्रामक कार्यवाही न करना
(3) एक दूसरे के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप न करना
(4) समानता और परस्पर लाभ की नीति का पालन करना तथा
(5) शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की नीति में विश्वास रखना।

विदेश मामलों के जानकार मानते हैं कि अगर भारत और चीन के बीच पंचशील समझौते के तहत जो पांच बातें हुई थी उन पर आज भी अमल किया जाना जरूरी है। यह बात अलग है कि ७० सालों के बीच दोनों देशों के बीच परिस्थितियां कई बार उतार-चढ़ाव वाली बनती रही है। लेकिन यह भी बड़ा सत्य है कि २१वीं सदी में विश्व शांति और आर्थिक उन्नति के लिए भारत और चीन की अहम भूमिका रहने वाली है, इसलिए दुनिया भर की नजर इन दोनों देशों की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों पर रहती है, यही वजह है कि एशिया की इन दो महाशक्तियों के बीच परस्पर शांति बने रहना जरूरी है।
पिछले तीन सालों में दोनों देशों की सीमाओं पर शांतिपूर्ण वातावरण रहा है।

जो निश्चित तो नहीं लेकिन भारत और चीन के बीच सामान्य स्थिति में आंशिक वापसी के संकेत हैं, जिसमें पंचशील के दूसरे समझौते गैर-आक्रमण का ध्यान रखा जाने की तरह देखा जा सकता है, बीते साल २०२३ में भी भारत-चीन के संबंधों में नरमी ही दिखी। फिलहाल भारत में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं, ऐसे में नई सरकार के गठन के बाद दोनों देशों के बीच चीजें और मधुर होने के संकेत मिल रहे हैं। अगर सब कुछ सकारात्मक रहता है तो भारत और चीन के नजरिए से ये साल बेहद अहम साबित हो सकता है।
भारत और चीन दुनिया का उभरता हुआ मार्केट है, २०२३ के एक कार्यक्रम में भारत में चीनी कार्यवाहक राजदूत की तरफ से यह जानकारी दी गई थी कि भारत और चीन का व्यापार २०२३ में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।

जो १३६.२ बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि के साथ था, यह व्यापार २०२२ के आंकड़े को पार कर गया था, २०२३ में चीन को भारत का निर्यात भी ६ प्रतिशत तक बढ़ा था। इसके अलावा उन्होंने इस कार्यक्रम में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों यानि पंचशील समझौते की ७०वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए दोनों देशों के संबंधों को नियंत्रित करने वाला एक बुनियादी मानदंड कहा था। ऐसे में भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से यह बयान भी अहम माना गया था। कोरोना काल के बाद भी दोनों देशों के बीच व्यापार ठीक रहा, जबकि चीन के महावाणिज्य दूतावास की तरफ से २०२३ में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में जानकारी दी गई थी कि चीनी दूतावास और महावाणिज्य दूतावास ने २०२३ में १.८ लाख से अधिक वीजा जारी किए थे, यानि इतने लोग चीन गए थे, जबकि चीन से भी भारत आने वाले लोगों की संख्या अच्छी थी।

जो यह दर्शाता है कि कोरोना काल के बाद दोनों देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय आवाजाही में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है, जिसमें व्यापार अहम माना गया है। भारत और चीन के बीच संबंधों में स्थिरता विश्व शांति के लिए जरूरी है। जिसमें पंचशील समझौता आज भी अहम है, क्योंकि भारत और चीन ने न केवल अपनी आर्थिक स्थितियों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं बल्कि विकास की रफ्तार को भी बनाए रखने पर फोकस किया है, जो आने वाले वक्त में दोनों देशों के लिहाज से उपयोगी कदम साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि विकास और आर्थिक मुद्दों पर पंचशील समझौता अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में दिशा निर्देशक सिद्धांत की तरह उपयोगी है।

(लेखकः दिव्या तिवारी)

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