Last Updated: November 5, 2026

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दुनिया में 73 करोड़ लोग हैं भूखे, क्‍यों चर्चा में है चीन?

October 27, 2025

दुनिया में 73 करोड़ लोग हैं भूखे, क्‍यों चर्चा में है चीन?

इंटरनेशनल डेस्क: हर साल दुनिया भर में 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1981 में हुई थी जब संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने इस दिन को चुना ताकि दुनिया का ध्यान खाने और खेती की तरफ जाए। इसका मकसद है कि लोग भूख, कुपोषण और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों को गंभीरता से लें। इस साल 2025 में भी ये दिन खास तरह से मनाया गया,क्योंकि दुनिया भर में खाद्य उत्पादन और बराबर वितरण की चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। दुनिया भी अभी भी तकरीबन 73 करोड़ लोग ऐसे हैं जो

भूखे रहते हैं। इन सबके बीच चीन ने इस मौके पर कुछ ऐसा किया जिसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है।आइए सबसे पहले ये जानते हैं कि ये दिवस क्‍यों जरूरी है और चीन आखिर ऐसा क्‍या किया जिससे वह सुर्खियों में है।

क्यों जरूरी है ये दिन?

क्‍या आपको पता है आज भी दुनिया में लाखों लोग भूखे पेट सोते हैं।FAO की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2024 तक करीब 73 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे थे। ऐसे में विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि खाने का हक सबको है। ये दिन जिम्मेदारी का भी है। दुनिया की सरकारें इस दिन रैलियां, सेमिनार और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं ताकि खेती को बढ़ावा मिले खाद्य उत्पादन बेहतर हो और बर्बादी कम हो।

आखिर चीन ने ऐसा क्‍या किया?

चीन ने इस मामले में गजब का काम किया। 2021-2025 की 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान चीन ने अपनी खाद्य उत्पादन क्षमता को और मजबूत किया। यहां अनाज उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और 2025 में भी ये सिलसिला जारी है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने आधुनिक खेती तकनीकों जैसे ड्रोन और स्मार्ट इरिगेशन को अपनाकर फसलों की पैदावार बढ़ाई है। इसका नतीजा ये है कि आज चीन न सिर्फ अपनी 140 करोड़ की आबादी का पेट भर रहा है बल्कि ग्लोबल फूड सप्लाई में भी बड़ा रोल निभा रहा है। चीन ने 2025 में विश्व खाद्य दिवस पर खास प्रोग्राम किए। पेइचिंग और शांगहाई जैसे शहरों में किसानों और वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। साथ ही स्कूलों में बच्चों को खेती और खाने की अहमियत समझाई गई। ग्लोबल टाइम्स के हवाले से बताया गया है कि चीन ने सस्टेनेबल एग्रीकल्चर पर जोर दिया है ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ज्यादा से ज्यादा अन्‍न पैदा हो।

चुनौतियां और आगे की राह

ये सब कुछ इतना आसान नहीं है। जलवायु परिवर्तन, मिट्टी का खराब होना और पानी की कमी खेती के लिए बड़े खतरे हैं। गार्जियन की एक रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से फसलों की पैदावार पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा खाने की बर्बादी भी एक बड़ी समस्या है।FAO का कहना है कि दुनिया में हर साल 1।3 अरब टन खाना बर्बाद हो जाता है। विश्व खाद्य दिवस हमें ये सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं जैसे खाना बर्बाद न करना,लोकल किसानों को सपोर्ट करना और पर्यावरण को बचाने में मदद करना।

एक साथ मिलकर बदलाव

विश्व खाद्य दिवस 2025 का थीम था-खाद्य सुरक्षा और सतत विकास। ये हमें बताता है कि अगर हम भूख और कुपोषण को खत्म करना चाहते हैं तो सबको मिलकर काम करना होगा। सरकारें, किसान, वैज्ञानिक और हम आप जैसे आम लोग सबकी जिम्मेदारी है। चीन जैसे देशों के प्रयास प्रेरणा देते हैं लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब पूरी दुनिया एकजुट होगी। तो आइए हम प्रण लें कि हम भूख मिटाने में अपना योगदान देंगे क्योंकि खाना सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि हर इंसान का हक है।

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(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक— डी के)

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