Last Updated: September 21, 2026

Dainik Savera Times Logo

शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति के 75 वर्ष : सीपीसी के नेतृत्व में सर्वांगीण विकास की गाथा

May 26, 2026

शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति के 75 वर्ष : सीपीसी के नेतृत्व में सर्वांगीण विकास की गाथा

इंटरनेशनल डेस्क: मन में बसा शीत्सांग: बचपन में, जब मैं प्राइमरी स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ता था, तब एक दिन मैंने अपनी इतिहास की किताब में चीनी धर्माचार्य ह्वेनसांग और उनके तीन शिष्यों की भारत यात्रा की कहानी पढ़ी थी। उसी समय मैं पहली बार चीन के “तिब्बत” शब्द से परिचित हुआ था। वैसे, चीनी सरकार ने तीन साल पहले तिब्बत के लिए अंग्रेजी अनुवाद को “तिब्बत” से बदलकर “शीत्सांग” कर दिया था।

फिर 1985 में, जब मैंने चाइना रेडियो इंटरनेशनल (CRI, अब CGTN रेडियो) का हिंदी कार्यक्रम सुनना शुरू किया, तो शीत्सांग मेरे हृदय पर गहरा प्रभाव छोड़ गया। सीआरआई और चीनी मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों के माध्यम से शीत्सांग का प्राचीन और वर्तमान इतिहास, उसका आर्थिक विकास और स्थिरता, लोगों का शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन, प्रसिद्ध विभूतियाँ, पुराने सांस्कृतिक अवशेष, रमणीक स्थल और तिब्बती जाति की रंग-बिरंगी संस्कृति मेरे मानसपटल पर अंकित हो गई।

यहाँ मैं तिब्बती-चीनी लेखक आ लाए (Alai) के प्रसिद्ध उपन्यास ‘लाल पोस्ते के फूल’ (Red Poppies) से कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहता हूँ: “चाहे एक किताब के लिए हो या किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता के लिए, यह ज़मीन कहीं अधिक विशाल लगती है। नदियाँ दिन-रात बहती हैं, चारों मौसम बदलते रहते हैं और यहाँ का जन-जीवन सदाबहार रहा है।”

हाँ, यही है मेरे कल्पना की आँखों से देखा हुआ चीन का शीत्सांग, जो पृथ्वी की छत कहे जाने वाले दुनिया के सबसे ऊँचे छिंगहाई-तिब्बत पठार पर, चीन की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर स्थित है। इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह विशाल भूखंड शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश अपार सुंदरता का प्रतीक है।

शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ:

23 मई इस साल शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ है—एक ऐसी उपलब्धि जिसका ऐतिहासिक महत्व युगांतकारी है। शीत्सांग प्राचीन काल से ही चीन का अभिन्न अंग रहा है। 13वीं शताब्दी में युआन राजवंश (1271-1368) द्वारा चीन के एकीकरण के बाद, शीत्सांग को आधिकारिक रूप से केंद्र सरकार के प्रशासन में शामिल किया गया। इसके बाद मिंग (1368-1644), छिंग (1644-1911) राजवंशों और चीन गणराज्य (1912-1949) ने लगातार शीत्सांग पर संप्रभुता का प्रयोग किया।

शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति आखिरकार 23 मई 1951 को हासिल हुई, जब ‘तिब्बत की शांतिपूर्ण मुक्ति के उपायों पर केंद्रीय जन सरकार और तिब्बत की स्थानीय सरकार के बीच समझौता’ जिसे ’17-सूत्रीय समझौता’ कहा जाता है पर हस्ताक्षर हुए।

17-सूत्रीय समझौता शीत्सांग के इतिहास का निर्णायक मोड़ है। इसने न केवल बाहरी औपनिवेशिक महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाई, बल्कि तिब्बती जनता को शांति और आत्मनिर्णय के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। इसी समझौते ने तिब्बती समाज को आधुनिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन की राह पर अग्रसर किया।

1959 में लोकतांत्रिक सुधार से पहले शीत्सांग के किसान और दास सामंती व्यवस्था के बोझ तले दबे थे न आज़ादी थी, न इज़्ज़त, न भविष्य की कोई उम्मीद। यह ऐसी व्यवस्था थी जहाँ व्यक्ति की कीमत उसके जन्म से तय होती थी।

28 मार्च 1959 को चीन की राज्य परिषद ने शीत्सांग में लोकतांत्रिक सुधार शुरू करने का ऐलान किया। इसी दिन से “धार्मिक-राजनीतिक” सामंती दास प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। उस दिन लाखों तिब्बती दासों ने पहली बार अपनी ज़िंदगी पर अपना हक़ पाया। यह निर्विवाद है कि 1951 से पहले वाले पिछड़े, सामंती शीत्सांग की जगह आज एक आधुनिक, विकसित और आत्मनिर्भर शीत्सांग खड़ा है।

शीत्सांग ने पलटा पन्ना: विकास का नया अध्याय शुरू:

1951 में शांतिपूर्ण मुक्ति से लेकर 1965 में शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की स्थापना तक, इन सात दशकों में शीत्सांग ने जो आर्थिक और सामाजिक छलांग लगाई है वह वाकई उल्लेखनीय है। इसने अपनी विकास यात्रा में एक नए युग की नींव रखी है।

आज, 75 साल बाद शीत्सांग की तस्वीर देखकर गर्व होता है। जहाँ कभी अभाव और गरीबी का बोलबाला था, वहाँ अब पक्के मकान, आधुनिक स्कूल, बेहतरीन अस्पताल और तरक्की के अनगिनत अवसर खड़े हैं। यह बदलाव सिर्फ आँकड़ों का नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन में आए ठोस सुधार का प्रमाण है।

नए युग में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के सशक्त मार्गदर्शन और पूरे देश के सहयोग से शीत्सांग ने चरम गरीबी को पूरी तरह मिटा दिया है। आज तिब्बत में सामाजिक स्थिरता है, अर्थव्यवस्था और संस्कृति फल-फूल रही है, और पर्यावरण भी संतुलित है।

इसका सीधा नतीजा यह है कि यहाँ के लोग पहले से कहीं बेहतर, संतुष्ट और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। इसी प्रक्रिया में एक नया समाजवादी शीत्सांग आकार ले चुका है जो उम्मीद और प्रगति का जीवंत प्रतीक बन गया है।

शीत्सांग के आर्थिक विकास की तेज़ होती गति:

तथ्यों ने पूरी तरह से यह साबित कर दिया है कि शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश को ‘चीनी विशेषताओं वाले’ एक आधुनिक समाजवादी क्षेत्र के रूप में विकसित करने के चीन के अथक प्रयास सफल रहे हैं।

दरअसल, शीत्सांग का आर्थिक कायापलट वाकई उल्लेखनीय है। 2025 में क्षेत्र की जीडीपी 3,03,189 करोड़ युआन तक पहुँच गई, और पहली बार 3,00,000 करोड़ युआन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया। यह रफ्तार 2026 में भी बरकरार है। पहली तिमाही में जीडीपी 77,800 करोड़ युआन रही, जो 6.1% की सालाना वृद्धि दर्शाती है। यह दर पूरे देश में पहले स्थान पर बनी हुई है।

लोगों का जीवन स्तर बुनियादी तौर पर बदल गया है। 2019 में गरीबी उन्मूलन के ऐतिहासिक लक्ष्य को हासिल करने के बाद, शीत्सांग ने अपने लोगों से किया वादा निभाया है। आज शहरी निवासियों की प्रति व्यक्ति डिस्पोजेबल आय 55,444 युआन और ग्रामीण निवासियों की 21,578 युआन हो गई है। पिछले दशकों की तुलना में यह 100 गुना से ज्यादा की छलांग है। यह उछाल हर परिवार के रोजमर्रा के जीवन में आए ठोस और वास्तविक बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण है।

शीत्सांग में डिजिटल युग का नया चेहरा:

तकनीक शीत्सांग में जीवन बदल रही है, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढाँचे को एकीकृत कर रही है। 72,000 मोबाइल बेस स्टेशनों और 94% गाँवों में 5G कवरेज के साथ, राजधानी ल्हासा अब एक “गिगाबिट सिटी” है। 5G-सक्षम रोबोटिक सर्जरी और AI मेडिकल कंसोर्टियम स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बना रहे हैं, जबकि “डुअल-टीचर क्लासरूम” छात्रों को पेइचिंग के शीर्ष शिक्षकों से जोड़ रहे हैं। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म जौ प्रोसेसिंग और पारंपरिक चिकित्सा जैसे स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रशासन में AI ने मंज़ूरी प्रक्रिया को सरल बना दिया है, जिससे जटिलता और समय दोनों कम हुए हैं। यह साफ है कि डिजिटल तकनीक अब शीत्सांग में जीवन जीने के तरीके को और बदल रही है।

प्रकृति और विकास का संतुलन:

मानव सभ्यता और प्रकृति के बीच सामंजस्य बनाए रखते हुए शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश आधुनिकीकरण के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

चीनी सरकार हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व देती है। 26 अप्रैल 2023 को चीन की राष्ट्रीय जन कांग्रेस की स्थायी समिति ने एक विशेष कानून पारित किया था ‘छिंगहाई- शीत्सांग पठार पर्यावरण संरक्षण कानून’और 1 सितंबर 2023 से इसे लागू कर दिया गया। ये कानून और नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं। इन्हें लागू करके हर जातीय समूह के पर्यावरणीय अधिकार सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

ये कानून और नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं हैं। इन्हें लागू करके हर जातीय समूह के पर्यावरणीय अधिकार सुनिश्चित किए जा रहे हैं। स्वच्छ हवा, नीले आसमान और निर्मल प्रकृति के लिए शीत्सांग की राजधानी ल्हासा चीन के सबसे कम प्रदूषित शहर के रूप में जानी जाती है।

शीत्सांग में धार्मिक स्वतंत्रता, एकता और परंपरा का जीवंत प्रमाण:

शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश बहुजातीय और बहुधार्मिक सद्भाव का सशक्त उदाहरण है। यहाँ तिब्बती आबादी 86% से अधिक है, साथ ही हान, ह्वी, मनबा, लोबा, नाशी और त्वुलुङ जैसी दर्जनों जातियाँ अनार के दानों की तरह एकजुट हैं। 1959 में 12.28 लाख से बढ़कर 2020 में जनसंख्या 31.3 लाख से अधिक हो गई, जो क्षेत्र की स्थिरता और बेहतर जीवन स्तर का प्रमाण है।

शीत्सांग में धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है। माना जाता है कि बौद्ध धर्म का शीत्सांग में प्रवेश 7वीं शताब्दी में हुआ। तब से लेकर पिछले 1300 वर्षों में तिब्बती बौद्ध धर्म का निरंतर विकास और विस्तार हुआ है। तिब्बती बौद्ध धर्म, बोन, इस्लाम और कैथोलिक धर्म शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में हैं।

1978 से चीन की केंद्र सरकार तिब्बत के लामावादी मठों के संरक्षण पर अरबों युआन लगा चुकी है। आज शीत्सांग के 1,787 बौद्ध स्थलों में 46,000 से अधिक भिक्षु-भिक्षुणियाँ अपनी परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु ल्हासा स्थित पोटाला महल, जोखांग मंदिर, नोर्बुलिंग्का ग्रीष्मकालीन महल, गेंज़ी मठ और गेनदन मठ जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन करते हैं। यह दर्शाता है कि परंपराएँ सुरक्षित हैं और फल-फूल रही हैं।

कुछ पश्चिमी चीन-विरोधी ताकतें राजनीतिक स्वार्थ के लिए मानवाधिकार के नाम पर झूठ गढ़ती हैं। जबकि विश्व स्वीकार करता है कि तिब्बत प्राचीन काल से चीन का अभिन्न अंग है और कोई भी देश ‘तिब्बती स्वतंत्रता’ को मान्यता नहीं देता।

शीत्सांग प्रगति की ओर अग्रसर:

पिछले 75 वर्षों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मजबूत नेतृत्व में शीत्सांग ने तेज़ और निरंतर विकास किया है। सामाजिक सद्भाव, स्थिरता और जीवन स्तर में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। शीत्सांग की संस्कृति न केवल संरक्षित रही, बल्कि नए युग में और समृद्ध हुई है। यह ज़मीनी सच्चाई है, जिसे कोई भी बाहरी दुष्प्रचार नहीं बदल सकता। यह तय है कि सीपीसी के नेतृत्व में सुंदर और आधुनिक शीत्सांग आने वाले वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की नई ऊँचाइयाँ छुएगा।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— रविशंकर बसु)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें