
शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति के 75 वर्ष पूरे होना केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि यह उस लंबी यात्रा का प्रतीक है जिसमें एक क्षेत्र ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाए हैं। एक विदेशी पत्रकार के रूप में, और विशेष रूप से CGTN Hindi से जुड़े होने के कारण, मुझे 2024 में शीत्सांग की यात्रा करने का अवसर मिला। यह यात्रा मेरे लिए केवल एक पेशेवर दायित्व नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव थी जिसने शीत्सांग को लेकर मेरी समझ और दृष्टिकोण को और व्यापक बना दिया।
शीत्सांग के बारे में पहले से ही कई छवियाँ हमारे मन में बनी रहती हैं- हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाएँ, कैलाश पर्वत का आध्यात्मिक महत्व, बौद्ध संस्कृति की गहरी परंपरा और प्रकृति की अद्भुत शांति। लेकिन जब मैंने शीत्सांग को अपनी आँखों से देखा, तो मुझे इन सबके साथ एक और वास्तविकता दिखाई दी, तेजी से बदलता और विकसित होता शीत्सांग ।
मेरी यात्रा का पहला पड़ाव था ल्हासा। यह शहर शीत्सांग की संस्कृति का हृदय माना जाता है और सचमुच शीत्सांग की आत्मा जैसा महसूस होता है। यहाँ स्थित पोताला पैलेस को जब मैंने पहली बार सामने से देखा, तो उसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व ने मुझे गहराई से प्रभावित किया। यह केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि शीत्सांग की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।
शीत्सांग की यात्रा के दौरान जो बात मुझे सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करती रही, वह थी यहाँ का तेजी से विकसित होता बुनियादी ढाँचा। परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए बदलाव साफ दिखाई देते हैं। उदाहरण के तौर पर, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे ने दूरस्थ और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस रेलवे ने न केवल यात्रा को आसान बनाया है, बल्कि व्यापार, पर्यटन और शिक्षा के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। कई जगहों पर नए घर, बेहतर सड़कें और आधुनिक सुविधाएँ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में आए बदलाव को दर्शाती हैं। स्थानीय निवासियों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच पहले की तुलना में अधिक सुलभ और बेहतर हुई है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए नए अवसर खुल रहे हैं, चाहे वह पर्यटन उद्योग हो, सांस्कृतिक उद्यम हो या आधुनिक व्यवसाय।
मेरी यात्रा का एक विशेष अनुभव था आली की पुलान काउंटी की गलियों में घूमना। वहाँ चलते हुए मैंने स्थानीय जीवन को बहुत करीब से देखा। श्रद्धालु प्रार्थना चक्र घुमाते हुए दिखाई देते हैं, और साथ ही तिब्बती हस्तशिल्प और संस्कृति में रुचि लेने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। यह दृश्य बताते हैं कि आधुनिक विकास के साथ-साथ शीत्सांग अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सहेज कर आगे बढ़ रहा है।
एक विदेशी पत्रकार के रूप में मेरे लिए यह अनुभव बेहद महत्वपूर्ण रहा कि शीत्सांग आज विकास और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों को संतुलित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, लोगों की सादगी और जीवन के प्रति उनका सकारात्मक दृष्टिकोण मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ गए।आज, जब शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो यह क्षेत्र एक नए ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। यहाँ विकास, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश साफ नज़र आती है।
मेरे लिए, 2024 की यह यात्रा केवल एक यादगार अनुभव नहीं थी, बल्कि एक सीख भी थी। इसने मुझे यह विश्वास दिलाया कि शीत्सांग केवल “दुनिया की छत” ही नहीं, बल्कि परिवर्तन, संस्कृति और संभावनाओं की एक जीवंत कहानी भी है- एक ऐसी कहानी जो अभी भी आगे लिखी जा रही है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (दिव्या पाण्डेय)
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