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द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ: अस्थिरता में विकास और संवाद की दिशा में चीन की वैश्विक शांति पहल

May 13, 2025

द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ: अस्थिरता में विकास और संवाद की दिशा में चीन की वैश्विक शांति पहल

1 सितंबर 1939 से 2 सितंबर 1945 के बीच लड़ा गया द्वितीय विश्व युद्ध कई देशों के बीच हुआ था, जिसमें चीन भी शामिल था। लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ तक बहुत कुछ बदल गया है। क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा यह युद्ध केवल इतिहास की एक स्मृति नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा भी है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता, इसलिए युद्ध की जगह शांति की तरफ बढ़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, समझौते और साझा विकास जरूरी हैं, वर्तमान समय में जिस तरह से हालात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हुए हैं, जिसमें  वैश्विक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्षों के हालात दिखे हैं, ऐसी स्थिति में विश्व को एकजुटता में बांधने के प्रयासों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, जहां सभी को मजबूती से मिलकर काम करना है। चीन दुनिया की उन बड़ी शक्तियों में शामिल हैं जो न केवल सैन्य ताकत में मजबूत है बल्कि अर्थव्यवस्था भी दुनिया में पहले पायदान पर है। लेकिन चीन ने विश्व शांति की दिशा में कई बड़े कदम उठाए हैं और दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ चीन ने केवल अपने संबंधों को मजबूत किया है, बल्कि सभी को साथ लेकर चले की कोशिश भी की है। चीन आज के वक्त में विश्व शांति और विकास को बनाए रखने में कही न कही अहम भूमिका निभा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र में चीन की सक्रिए भूमिका
वैश्विक शांति बनाए बनाए रखने में चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होने के नाते अहम भूमिका निभा रहा है। चीन ने कई देशों में शांति मिशनों में योगदान दिया है और विकासशील देशों की आवाज को बल देने की मांग की है, क्योंकि चीन ने वैश्विक शांति की दिशा में काम करना चाहता है, चीन पारंपरिक शीत युद्ध मानसिकताऔर एकतरफावादका विरोध करता है, जबकि वह एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और न्यायपूर्ण वैश्विक शासन की वकालत करता है, जिससे छोटे और विकासशील देशों को भी समान अधिकार मिल सकें, यही मांग लगातार उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी उठाई है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिवभी चीन की चीन की एक वैश्विक विकास रणनीति है, जिसका उद्देश्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप को आधारभूत संरचना और व्यापार के माध्यम से जोड़ना है, यह परियोजना साझी समृद्धि और विकास को बढ़ावा देती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां आर्थिक विकास पिछड़ा हुआ है, जिसमें चीन विकास के लिए अहम योगदान दे रहा है।

दुनिया के सभी देशों में समन्वय बनाना
आज के वक्त में कई देशों में दुनिया में उतार-चढ़ाव का दौर दिखा है, ऐसे में वैश्विक शांति के लिए यह भी जरूरी है कि दुनिया के सभी देशों में समन्वय बनाया जाए, यही वजह है कि चीन की शांति स्थापना में प्रत्यक्ष भागीदारी करने की कोशिश करता है, चीन ने अफ्रीका और मध्य पूर्व में कई बार मध्यस्थता की भूमिका निभाई है, जैसे कि सऊदी अरब और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों में हाल के समय में हुई बहाली में चीन की मध्यस्थता एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, चीन ने सभ्यताओं के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मंचों जैसे सिविलाइजेशन इनिशिएटिवकी शुरुआत की है, जो पारस्परिक समझ और सांस्कृतिक सहिष्णुता को बढ़ाता है।

यानि चीन केवल एक उपयोगिता के हिसाब से काम नहीं करता बल्कि देशों के बीच परस्पर संबंधों को मजबूत करने पर भी फोकस कर रहा है। हालिया आंकड़ों पर नजर डाले तो चीन ने 1990 के बाद से 50,000 से अधिक शांति सैनिकों को लगभग 30 शांति अभियानों में भेजा है, वर्तमान में, 2,200 से अधिक चीनी शांति सैनिक आठ मिशन क्षेत्रों में तैनात हैं। इसके अतिरिक्त, चीन ने 8,000 सदस्यीय स्टैंडबाय बल और 300 सदस्यीय स्थायी पुलिस दस्ते की स्थापना की है। जो चीन की दूरदृष्टि को बताती हैं।

जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
दुनिया आज के दौर में कई तरह के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण परिवर्तन के दौर से भी गुजर रही है, विकास के लिए तेजी से होता पर्यावरण का दोहन रोकने के लिए चीन ने भी अपनी नीतियों में बदलाव किया है, जबकि दुनिया में भी इस दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं, क्योंकि चायना पर्यावरण को लेकर सर्तक और सचेत भी है। चीन ने कार्बन पीक और कार्बन न्यूट्रलके लिए दीर्घकालिक लक्ष्य तय किए हैं और वैश्विक जलवायु वार्ताओं में सक्रिय रूप से भाग लिया है, साथ ही, वह वैश्विक दक्षिण के देशों को हरित प्रौद्योगिकी और जलवायु अनुकूलन के लिए सहायता प्रदान करता है। चायना की कई नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ भी हुई है, जिसकी उपयोगिता चायना को दिखती है।

शांति का मार्ग जरूरी
80 सालों पहले की युद्ध-विजय की स्मृति यह सिखाती है कि शक्ति, प्रभुत्व या वर्चस्व के बजाय सहयोग, आपसी सम्मान और साझा भविष्य ही स्थायी शांति का मार्ग है, चीन इस दृष्टिकोण को अपने कूटनीतिक और विकासात्मक नीतियों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है, जबकि चुनौतियां अब भी मौजूद हैं, वैश्विक समुदाय को मिलकर काम करने की आवश्यकता है, ताकि विश्व शांति और सतत विकास केवल आदर्श न रहें, बल्कि वास्तविकता बनें, जो राष्ट्र और दुनिया की उन्नति के लिए जरूरी है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—दिव्या तिवारी)

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