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विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध की जीत की 80वीं वर्षगांठ: शांति को संजोएं और विकास को बढ़ावा दें

चीन ने जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध और विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में स्मारक गतिविधियों की घोषणा की। विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध की जीत की 80वीं वर्षगांठ का बहुत महत्व है। यह हमें उस शताब्दी-पुराने संघर्ष की याद दिलाता है, जब 80 साल पहले अंततः न्याय ने बुराई पर विजय प्राप्त की और दुनिया एक बार फिर शांति के पथ पर लौट आई। आज इस ऐतिहासिक क्षण में, युद्ध की पीड़ा को याद करना और इतिहास के सबक पर विचार करना हमें शांति की कीमत को गहराई से समझने में मदद करता है।

इस वर्ष जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध (1931-1945) और विश्व फ़ासीवाद-विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ है। इस युद्ध में विजय देशभक्ति को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय भावना की एक महान विजय है, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के केंद्रीय स्तंभ के रूप में संघर्ष करते हुए प्राप्त एक महान विजय है, एकजुटता और वीरता के माध्यम से पूरे राष्ट्र द्वारा प्राप्त एक महान विजय है, और चीनी जनता, फ़ासीवाद-विरोधी सहयोगियों और दुनिया भर के उन लोगों की एक महान विजय है जिन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी।

भारी कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद, चीनी जनता ने अटूट साहस और एकता का परिचय दिया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में और लाखों आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से, जापानी सेना के विरुद्ध प्रतिरोध पारंपरिक युद्ध, गुरिल्ला रणनीति और राष्ट्र की संप्रभुता की रक्षा के दृढ़ संकल्प के माध्यम से आकार ले सका।

चीन का प्रतिरोध केवल एक राष्ट्रीय संघर्ष नहीं था—यह फासीवाद के विरुद्ध वैश्विक अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। वर्षों तक, चीन एशियाई मोर्चे पर लगभग अकेला खड़ा रहा, जापान की सैन्य शक्ति के एक बड़े हिस्से को बाँधे रखा और अंततः मित्र राष्ट्रों की विजय में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध ने मानवता को अभूतपूर्व विनाश और पीड़ा का सामना कराया। लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई, असंख्य परिवार बर्बाद हुए और पूरे देश तबाह हो गए। फासीवाद और सैन्य आक्रमण के काले अध्याय ने साबित कर दिया कि हिंसा और अत्याचार कभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सकते। इस युद्ध की समाप्ति के बाद, दुनिया ने संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों के माध्यम से शांति और सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया।  

आज भी, जबकि दुनिया नए संघर्षों और तनावों का सामना कर रही है, फासीवाद-विरोधी युद्ध की सीख हमारे लिए मार्गदर्शक होनी चाहिए। हमें यह याद रखना चाहिए कि शांति और सहयोग ही टिकाऊ विकास का आधार हैं। आतंकवाद, जातीय संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

शांति और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। वैश्विक चुनौतियाँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, महामारी, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता—किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। इनसे निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और आपसी समझ की आवश्यकता है। देशों को अपने मतभेदों को कूटनीतिक तरीके से हल करने का मार्ग अपनाना चाहिए और एक शांतिपूर्ण, समावेशी तथा टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए।

विश्व एंटी-फासीवादी युद्ध की 80वीं वर्षगांठ केवल अतीत की स्मृति नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के लिए एक चेतावनी भी है। यह अवसर हमें प्रेरित करता है कि हम युद्ध की पीड़ा को न दोहराएँ, और मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाएं जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिलें।

आइए, इस ऐतिहासिक दिन पर हम सभी यह संकल्प लें कि शांति की रक्षा करेंगे, और विकास की ओर मिलकर कदम बढ़ाएंगे – ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और समृद्ध विश्व विरासत में मिले।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

 

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