23 सितंबर तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 152 देश फिलिस्तीन देश को मानते हैं। सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्य देशों में से सिर्फ अमेरिका ने फिलिस्तीन देश को मान्यता नहीं दी है। फिलहाल फिलिस्तीन देश की मान्यता लहर से अमेरिका और इज़रायल फिलिस्तीन-इज़रायल मुद्दे पर कूटनीतिक अकेलेपन में पड़े हैं। चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन सीजीटीएन द्वारा आयोजित एक वैश्विक सर्वे से ज़ाहिर है कि 78.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का विचार है कि दो देश योजना का कार्यांवयन फिलिस्तीन सवाल के समाधान का एकमात्र रास्ता है और मध्यपूर्व में शांति पूरा करने का मूल रास्ता है।
इस सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक 90.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इज़रायल की हिंसक कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की और यह पक्ष लिया कि इज़रायल को फौरन ही गाजा में फौजी कार्रवाई बंद करनी चाहिए। 92.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कदम उठाकर गाजा पर इज़रायल का सैन्य हमला रोकने की अपील की। 95.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने फिलिस्तीनी लोगों को जबरन स्थानांतरित करने का कड़ा विरोध किया और संभी बंद किये गये नागरिकों व बंदियों को रिहा करने की अपील की।
इसके अलावा 93.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में अमेरिका ने इज़रायल को गाजा में जातीय नर –संहार करने के लिए उकसावा दिया। 92.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका को फौरन ही इज़रायल की सैन्य सहायता बंद करना चाहिए। 82.3 प्रतिशत लोगों का विचार है कि फिलिस्तीन देश की मान्यता लहर से अमेरिका और इज़रायल अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अलगाव में पड़ा हुआ है।
ये भी पढ़ें: भाई तारा सिंह वां जी की 300वीं शहादत: अमृतसर में 3 दिन तक चलेगा भव्य खालसाई नगर कीर्तन
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

