वाशिंगटन : अमरीका ने भारत समेत दुनिया के 60 देशों की ओर से बंधुआ मजदूरी और श्रम कानूनों का उल्लंघन कर बने सामान के आयात पर कड़ा प्रतिबंध न लगाने के कारण इन देशों पर विशेष सीमा शुल्क लगाने का फैसला किया है। अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देशों के तहत 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई की है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ना तय माना जा रहा है, हालांकि विशिष्ट श्रेणियों में अमरीका ने उत्पाद छूट का प्रावधान देकर राहत भी दी है।
अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि ने व्यापक जांच, 2 दौर की सार्वजनिक सुनवाइयों और 2,100 से अधिक सुझावों के विश्लेषण के बाद अलग-अलग देशों के लिए शुल्क की अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। भारत सहित अर्जेंटीना, बंगलादेश, कंबोडिया, कनाडा, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा ब्रिटेन को 10 प्रतिशत की दर के दायरे में रखा गया है।
ये वे देश हैं, जिन्होंने जबरन श्रम के खिलाफ या तो आंशिक कदम उठाए हैं या द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के तहत इसे रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। दूसरी श्रेणी में यूरोपीय संघ (ईयू), ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड शामिल हैं, जिनके गैर-छूट वाले उत्पादों पर मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) दर को घटाकर 10 फीसदी से 12.5 फीसदी का टैरिफ लगेगा। वहीं, जिन देशों ने जबरन श्रम रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं, उन सभी अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर अधिकतम 12.5 फीसदी की दर से टैरिफ थोपा गया है।

