Last Updated: October 17, 2026

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CGTN सर्वेक्षण: ‘मानवता पर हमला करने वाला विशेषाधिकार बन गया है ‘अमेरिकी सपना’ 

February 12, 2026

CGTN सर्वेक्षण: ‘मानवता पर हमला करने वाला विशेषाधिकार बन गया है ‘अमेरिकी सपना’ 

एप्सटीन फाइल्स के निरंतर सार्वजनिक होने के साथ ही अमेरिकी ‘मानवाधिकार रक्षकों’ की छवि तेजी से ध्वस्त हो रही है। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) द्वारा कराए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, 92 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि एप्सटीन मामले ने अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के साझा मूल्य आधार के पूर्ण पतन को उजागर कर दिया है।

यह मामला अमेरिकी अभिजात्य वर्ग के दशकों पुराने मानवता विरोधी अपराधों का पर्दाफाश करता है। सर्वेक्षण में 85.1 प्रतिशत लोगों ने फाइलों की सामग्री पर गहरा आघात व्यक्त किया, जबकि 97.1 प्रतिशत ने कहा कि इस मामले से उजागर अभिजात्य वर्ग का व्यापक नैतिक पतन मानवीय अंतःकरण का गंभीर अपमान है। आज तक इस मामले में शामिल राजनीतिक और व्यावसायिक हस्तियों के खिलाफ कोई न्यायिक जांच नहीं हुई है, जिस पर 95.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि अमेरिकी न्याय प्रणाली शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग के साथ ‘दोहरा मापदंड’ अपनाती है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले से सम्बंधित दस्तावेज़ लंबे समय से अदालतों में सील थे। कुल फाइलों के आधे से भी कम को ही जारी किया गया है, जिनमें भी बड़े हिस्से को काला कर दिया गया है और शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छुपाई गई है। सर्वेक्षण में 93.9 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिकी न्याय विभाग की यह ‘चयनात्मक पारदर्शिता’ अमेरिकी न्याय प्रणाली को विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की सुरक्षा कवच में बदल चुकी है। 89.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अमेरिकी न्याय प्रणाली की लंबे समय से चली आ रही निष्क्रियता की आलोचना करते हुए कहा कि इस मामले ने अमेरिकी कानूनी व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर क्षति पहुंचाई है।

एप्सटीन मामला पूंजी और सत्ता के बीच की शिकारी सांठगांठ को उजागर करता है: पूंजी सत्ता को समर्थन देती है, और सत्ता पूंजी को आपराधिक प्रतिरक्षा प्रदान करती है। आम नागरिक बलि का बकरा बन जाते हैं, जिनमें गरीब नाबालिग लड़कियां सबसे आम शिकार हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, 92.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अमेरिकी समाज के निचले तबके के वंचित समूहों, विशेषकर गरीब नाबालिग लड़कियों, के सामने आने वाले प्रणालीगत जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की। 86.7 प्रतिशत का मानना है कि इस मामले ने आम अमेरिकी नागरिकों की अंतिम सुरक्षा-रेखा न्यायिक संरक्षण में उनके विश्वास को तोड़ दिया है, जिससे अमेरिका में सामाजिक सुरक्षा की भावना हिमांक बिंदु पर पहुंच गई है। 91.8 प्रतिशत ने कहा कि एप्सटीन मामला मानवाधिकार कांड का एक और अकाट्य सबूत बन गया है, जिसने अमेरिका की तथाकथित ‘मानवाधिकार कूटनीति’ और नैतिक अपील को गंभीर रूप से कमजोर किया है।

विडंबना यह है कि इस मामले पर विवाद अमेरिका के भीतर लगातार तेज़ हो रहा है, जो डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों के बीच परस्पर हमलों और आरोप-प्रत्यारोप का हथियार बन गया है। 85.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि यह मामला दलीय टकराव और सामाजिक विभाजन को और बढ़ाएगा, जबकि 92.7 प्रतिशत का कहना है कि इस मामले के पीछे की प्रणालीगत भ्रष्टाचार अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, जो यह संकेत देता है कि अमेरिकी समाज अपने मूल्यों के एक अभूतपूर्व मोहभंग का सामना कर सकता है। बता दें कि यह सर्वेक्षण हाल के दिनों में सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफार्मों पर जारी किया गया, जिसमें 24 घंटों के भीतर 9,690 नेटिजन्स ने मतदान किया और अपने विचार व्यक्त किए। 

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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