ओटावा: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपनी नई कैबिनेट में बड़ा फेरबदल करते हुए अनुभवी राजनेता अनीता आनंद को देश की विदेश मंत्री नियुक्त किया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत के साथ तनावपूर्ण और लगभग ठप्प हो चुके द्विपक्षीय संबंधों को दोबारा मजबूत आधार देना होगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में खालिस्तान मुद्दे और राजनयिक निष्कासन को लेकर गहरी खाई बन चुकी है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने मंत्रिपरिषद के पुनर्गठन के दौरान स्पष्ट कर दिया कि नई कैबिनेट से वह नई सोच, स्पष्ट दिशा और निर्णायक कदमों की उम्मीद रखते हैं। अनीता आनंद, जो इससे पहले कनाडा की रक्षा मंत्री और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी अन्य अहम जिम्मेदारियाँ संभाल चुकी हैं, अब कूटनीति की बागडोर थामेंगी।
-भारत-कनाडा संबंधों की पुनर्बहाली का मिशन
पीएम कार्नी ने कहा, “हम चाहते हैं कि कनाडा विश्व मंच पर एक रचनात्मक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरे। अनीता आनंद को विशेष रूप से भारत के साथ फिर से संवाद स्थापित करने और विश्वास बहाली की जिम्मेदारी दी गई है।” यह बयान भारत और कनाडा के बीच तनावपूर्ण रिश्तों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पूर्व विदेश मंत्री मेलानी जोली के कार्यकाल में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद उपजे विवाद के चलते दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध काफी कमजोर पड़ गए थे। जोली द्वारा भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किए जाने के बाद भारत ने भी कनाडाई राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अनीता आनंद का नया कार्यकाल इस गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
-राजनीति में वापसी, शिक्षा से मोहभंग
गौरतलब है कि जनवरी में अनीता आनंद ने सार्वजनिक रूप से राजनीति से संन्यास लेने और शिक्षा क्षेत्र में लौटने की बात कही थी। लेकिन हाल में हुए संघीय चुनावों में एक बार फिर से जनसमर्थन मिलने और प्रधानमंत्री कार्नी के आग्रह पर उन्होंने सक्रिय राजनीति में वापसी की और विदेश मंत्रालय का दायित्व स्वीकार किया।
-नया मंत्रिमंडल, बदली प्राथमिकताएँ
प्रधानमंत्री कार्नी की नई कैबिनेट में कुल 28 मंत्री शामिल हैं, जो ट्रूडो सरकार की 39 सदस्यीय टीम की तुलना में अधिक संक्षिप्त और लक्षित है। हालांकि, इस बार भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की संख्या में गिरावट देखी गई है। मनिंदर सिद्धू को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री बनाया गया है, जबकि रूबी सहोता और रणदीप सराय को राज्य सचिव जैसे अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली पद दिए गए हैं।
पूर्व रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन ने चुनाव नहीं लड़ा, वहीं आरिफ विरानी और कमल खेड़ा को नई कैबिनेट में स्थान नहीं मिला है। इस बदलाव को कार्नी के ‘नए युग की शुरुआत’ के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कूटनीति, व्यापार और आंतरिक नीति पर नए दृष्टिकोण अपनाने की बात कही जा रही है।
-अमेरिका के साथ भी संबंध होंगे केंद्र में
भारत के अलावा, अनीता आनंद को अमेरिका के साथ व्यापार और सुरक्षा संबंधों को भी और अधिक मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डोमिनिक लेब्लांक को कनाडा-अमेरिका व्यापार मंत्री बनाकर संकेत दिया गया है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद और आर्थिक रणनीतियाँ अब शीर्ष प्राथमिकता पर हैं।
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