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हिंद महासागर में एक और ईरानी युद्धपोत मुश्किल में फंसा, श्रीलंका से मांगी आपात मदद

Another Iranian warship runs into trouble the Indian Ocean

Another Iranian warship runs into trouble the Indian Ocean

कोलंबो: हिंद महासागर में हाल ही में एक बड़ा नौसैनिक घटनाक्रम सामने आया है। खबरों के अनुसार, अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS DENA पर टॉरपीडो से हमला कर दिया, जिसके बाद यह जहाज डूब गया। इस घटना से पूरे अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।

एक और ईरानी युद्धपोत मुश्किल में

बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद उसी इलाके में मौजूद ईरान का एक और युद्धपोत भी मुश्किल में फंस गया है। इस जहाज ने श्रीलंका से मदद मांगी है और उसके समुद्री क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति भी मांगी है। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वह इस मामले पर विचार कर रही है और जहाज पर मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने संसद में इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान का यह दूसरा युद्धपोत फिलहाल श्रीलंका के विस्तारित आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के पास इंतजार कर रहा है, लेकिन अभी वह श्रीलंका के आधिकारिक समुद्री क्षेत्र में दाखिल नहीं हुआ है। जहाज की ओर से आपात सहायता का अनुरोध किया गया है।

ईरानी युद्धपोत 80 से ज्यादा शव बरामद

इससे पहले हुए हमले के बाद श्रीलंका की नौसेना ने राहत और बचाव अभियान चलाया था। अधिकारियों के अनुसार, डूबे हुए ईरानी युद्धपोत IRIS DENA से करीब 80 से ज्यादा ईरानी नाविकों के शव बरामद किए गए हैं। कुछ नाविकों को जिंदा भी बचा लिया गया था।

हमले में घायल हुए नाविकों का इलाज श्रीलंका के गॉल शहर के करापिटिया अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है और उनकी चोटें ज्यादा गंभीर नहीं हैं। वहीं मारे गए लगभग 84 ईरानी नौसैनिकों के शवों का पोस्टमॉर्टम भी इसी अस्पताल में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह ईरानी नौसैनिक बेड़ा भारत के विशाखापत्तनम में एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसी दौरान हिंद महासागर में यह हमला हुआ।

अमेरिका रक्षा मंत्री का बयान

अमेरिका के रक्षा मंत्री पेट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया था। हालांकि इस कार्रवाई की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल श्रीलंका सरकार का कहना है कि वह क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और जहाज पर मौजूद लोगों की जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने पर विचार कर रही है।

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