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यमन में एम्बुलेंस और अस्पतालों पर हमले, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं; यूएन की सुरक्षा की गुहार

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों ने कहा है कि यमन में जारी लड़ाई की वजह से बेघर हुए परिवारों को तुरंत खाने और रहने की जगह की जरूरत है। हिंसा बढ़ने के साथ लोगों की जरूरतें भी बढ़ रही हैं, जबकि राहत सामग्री तेजी से कम हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने सोमवार को कहा कि उसने अपने सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर बेघर हुए परिवारों और दूसरे जरूरतमंद लोगों के लिए मदद बढ़ाई है। हालांकि, पैसों की कमी और कई इलाकों तक सहायता पहुंचाने में आ रही दिक्कतें राहत कार्यों को प्रभावित कर रही हैं।

‘करीब 21,000 परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा’

ओसीएचए ने बताया कि एक अगस्त से अब तक यमन में करीब 21,000 परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। इनमें से ज्यादातर परिवार ताइज और लहज प्रांतों के हैं। रजिस्ट्रेशन का काम अभी जारी है, इसलिए यह संख्या और बढ़ने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने एक अगस्त से अब तक 36 घटनाओं में 125 आम नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि की है। इनमें 32 लोगों की मौत हुई और 93 लोग घायल हुए। इस महीने हताहत हुए लोगों में 80 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं। हालांकि, असल संख्या इससे काफी ज्यादा होने की आशंका है।

ओसीएचए के मुताबिक, शुक्रवार को लहज प्रांत में एम्बुलेंस पर हमले किए गए। इनमें एक ड्राइवर और एक इमरजेंसी मेडिकल कर्मचारी की मौत हो गई। समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, ताइज और लहज प्रांतों तथा अल-होदेदाह शहर में नौ स्वास्थ्य केंद्र या उनसे जुड़ी जगहें या तो क्षतिग्रस्त हुई हैं, बंद हो गई हैं या सीधे हमलों का निशाना बनी हैं। घायलों का इलाज कर रहे अस्पतालों में अब खून, एनेस्थीसिया की दवाओं और ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान की कमी होने लगी है।

ओसीएचए ने कहा कि यमन में महिलाएं और लड़कियां पहले से ही काफी खतरे का सामना करती रही हैं। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहद सीमित है। यमन में गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियों या बच्चे को जन्म देते समय हर दिन तीन महिलाओं की मौत होती है। हालिया लड़ाई ने इन खतरों को और बढ़ा दिया है।

बेघर हुए लोगों में 2,700 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं शामिल

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का अनुमान है कि बेघर हुए लोगों में 2,700 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। इनमें से करीब 300 महिलाओं की अगले दो हफ्तों में डिलीवरी होने की उम्मीद है, जबकि कम से कम 500 महिलाओं को इमरजेंसी प्रसूति या नवजात शिशु से जुड़ी चिकित्सा की जरूरत है। लेकिन ताइज में प्रसव से जुड़ी कई अहम इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं बंद हो गई हैं। इसकी वजह से कुछ बेघर महिलाओं को बिना प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की मदद के खुले में बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ओसीएचए ने बताया कि मानवीय सहायता संगठनों ने अब तक करीब 13,000 बेघर परिवारों को तुरंत जरूरत वाली राहत किट और दूसरी जरूरी सहायता पहुंचाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने अदन और मारिब शहरों के चार अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए जरूरी सामान और एंटीबायोटिक दवाएं पहुंचाई हैं। ओसीएचए ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आम नागरिकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और एम्बुलेंस की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट के पहुंचने दी जानी चाहिए।

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