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‘शेख हसीना को तुरंत वापस भेजें’, बांग्लादेश की भारत से मांग

इंटरनेशनल डेस्क: बांग्लादेश ने सोमवार को भारत से औपचारिक रूप से अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को तुरंत बांग्लादेश वापस भेजने की मांग की है। यह मांग उस समय आई जब बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने दोनों को पिछले साल हुए छात्र आंदोलन पर हिंसक कार्रवाई के आरोप में मौत की सजा सुनाई।

बांग्लादेश की भारत से मांग 

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा, ”हसीना और कमाल को “जुलाई नरसंहार” के लिए मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी पाया गया है। अगर कोई देश ऐसे “फरार दोषियों” को शरण देता है, तो यह “शत्रुतापूर्ण कदम” माना जाएगा। 2013 की भारत–बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को दोनों को तुरंत सौंपना कानूनी जिम्मेदारी है।” बयान में साफ कहा गया, “भारत की यह अनिवार्य ज़िम्मेदारी है कि वह इन दोषियों को बांग्लादेश के हवाले करे। हम भारत सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील करते हैं।”

हसीना और कमाल भारत में कब से हैं?

5 अगस्त 2024 से दोनों दिल्ली में शरण लिए हुए हैं। दोनों पर मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला और ICT ने दोनों को फांसी की सजा दी। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत को संधि का सम्मान करना चाहिए। जैसे हसीना को, वैसे ही कमाल को भी बिना देरी बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए ताकि वे सजा का सामना कर सकें।

भारत की प्रतिक्रिया- तनाव के बीच संतुलित बयान

बांग्लादेश में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत ने ICT के फैसले का संज्ञान लिया है। भारत शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के पक्ष में है। साथ ही भारत ने कहा कि वह बांग्लादेश के लोगों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। भारत ने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि वह हसीना को सौंपेगा या नहीं।

मेरे खिलाफ फैसला राजनीतिक बदला- शेख हसीना

बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने खिलाफ आए अदालती फैसले को पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक धांधली से बनाई गई अदालत ने सुनाया है, जिसे एक अनिर्वाचित (बिना जनादेश वाली) अंतरिम सरकार ने बनाया और चला रही है। इसका लक्ष्य देश की अंतिम चुनी हुई सरकार (अवामी लीग) को कमजोर करना है।

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