ढाका: बांग्लादेश में कल राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के लिए मतदान होगा। साल 2024 के व्यापक जन-आंदोलन के बाद यह पहला आम चुनाव है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 वर्ष पुरानी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। करीब 17 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 12.7 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
300 सीटों पर 1,981 उम्मीदवार मैदान में
चुनाव आयोग के मुताबिक, 300 संसदीय सीटों के लिए कुल 1,981 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सदस्य होते हैं, जिनमें 300 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। चुनाव फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के तहत होगा और निर्वाचित संसद का कार्यकाल पांच साल का रहेगा।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का भरोसा दिलाया है। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
पहली बार प्रवासी मतदाताओं को पोस्टल वोटिंग की सुविधा
इस बार चुनाव में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिक पहली बार डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) के जरिए मतदान कर सकेंगे। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए यूरोपीय संघ, कॉमनवेल्थ समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के करीब 500 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।
मतदान के साथ ही एक जनमत संग्रह भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें जुलाई नेशनल चार्टर के तहत प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों पर जनता की राय ली जाएगी। इन सुधारों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, कार्यकारी शक्तियों पर निगरानी बढ़ाना, द्विसदनीय संसद की स्थापना और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूत करना जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
नई सरकार के सामने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की चुनौती
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नई सरकार से नागरिक स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी और विपक्ष के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। करीब 50 लाख नए मतदाता इस बार वोट देंगे, जिनमें बड़ी संख्या उन युवाओं की है जो 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इसे युवा पीढ़ी की राजनीतिक भागीदारी की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
पारंपरिक दलों के साथ नई राजनीतिक ताकतों की एंट्री
बांग्लादेश की राजनीति लंबे समय से दो प्रमुख दलों अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के बीच केंद्रित रही है। इस चुनाव में बीएनपी, तारिक रहमान के नेतृत्व में, मजबूत दावेदार मानी जा रही है। तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद हाल ही में देश लौटे हैं और उन्होंने लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और आर्थिक सुधार का वादा किया है।
बीएनपी को 11 दलों के गठबंधन से चुनौती मिल रही है, जिसका नेतृत्व जमात-ए-इस्लामी कर रहा है। पूर्व में प्रतिबंधित यह पार्टी अब फिर से सक्रिय हुई है। गठबंधन में 2024 के आंदोलन से जुड़े नेताओं द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है।
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अल्पसंख्यकों और महिलाओं की सुरक्षा पर नजर
करीब 90 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले बांग्लादेश में हिंदू समुदाय लगभग 8 प्रतिशत है। हाल के महीनों में अल्पसंख्यक समुदायों ने धमकी और हिंसा की घटनाओं को लेकर चिंता जताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव के बीच नई सरकार को सामाजिक सौहार्द और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
यह चुनाव न सिर्फ सत्ता परिवर्तन का फैसला करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि बांग्लादेश आने वाले वर्षों में किस दिशा में आगे बढ़ेगा स्थिर लोकतंत्र की ओर या फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर।