ढाका: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का एक और मामला सामने आया है। शरियतपुर जिले में मेडिकल स्टोर चलाने वाले हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की शनिवार सुबह ढाका के नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन पर नए साल की पूर्व संध्या पर हमला किया गया था।
डॉक्टरों के अनुसार, खोकन दास गंभीर रूप से झुलस गए थे और उनके शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद सुबह करीब 7:20 बजे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना कैसे हुई?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे खोकन दास अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान दामुदिया उपजिला के केउरभांगा बाजार के पास कुछ बदमाशों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। पहले उन पर हमला किया गया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। जान बचाने की कोशिश में खोकन दास पास के एक तालाब में कूद गए। शोर सुनकर आसपास के लोग पहुंचे, तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। गंभीर हालत में उन्हें पहले शरियतपुर सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में ढाका रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, इस मामले में दो संदिग्धों की पहचान कर ली गई है। दोनों स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंसा की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिसंबर महीने में कई हिंदू युवकों की अलग-अलग घटनाओं में मौत हो चुकी है। इन मामलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। फिलहाल खोकन चंद्र दास की मौत ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

