नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह ने बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास का बचाव कर रहे पड़ोसी देश के वकील रवींद्र घोष से मंगलवार को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में मुलाकात की और वहां (बांग्लादेश में) हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों के वास्ते खड़े होने के लिए उन्हें सम्मानित किया।यह मुलाकात घोष के बेटे के बैरकपुर स्थित आवास पर हुई, जहां वकील फिलहाल चिकित्सा उद्देशय़ों के लिए रह रहे हैं। इस दौरान हिंदू संत कार्तिक महाराज भी मौजूद थे।
वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा के बारे में मुखर रहे हैं और चिन्मय कृष्ण दास का बचाव करने के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली हैं।
सिंह ने बैठक के बाद कहा, ‘‘हम बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए न्याय की लड़ाई में रवींद्र घोष के साहस की सराहना करते हैं। उनके जीवन को खतरे के बावजूद उनके अथक प्रयास हमें प्रेरित करते हैं।’’ काíतक महाराज ने भी सिंह की बात को दोहराते हुए उत्पीड़ित समुदायों के अधिकारों के लिए खड़े होने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘न्याय के प्रति रवींद्र घोष की प्रतिबद्धता मानवता की सच्ची भावना को दर्शाती है। इस काम में उनका समर्थन करना हमारा कर्तव्य है।’’ घोष ने हौसला अफजाई के लिए आभार व्यक्त किया तथा सताए गए अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा समर्थन पाकर बहुत खुशी हुई है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति बहुत खराब है और मैं अन्याय के खिलाफ लड़ाई जारी रखूंगा।’’ वकील ने मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली वर्तमान अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की ‘बिगड़ती’ स्थिति को भी उजागर किया।
उन्होंने कहा, ‘‘कट्टरपंथी और हिंसा पर अंतरिम प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है। यह न्याय का मखौल है।’’ इस महीने की शुरुआत में, ‘बांग्लादेश सम्मिलिता सनातनी जागरण जोत’ के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और अगले साल दो जनवरी तक जेल भेज दिया।
घोष ने दावा किया कि दास पर बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को एकजुट करने के उनके प्रयासों के कारण झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन अत्याचारों पर संज्ञन लेना चाहिए। अपने अधिकारों की मांग करने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के बीच एकता बहुत ज़रूरी है।’’

