इंटरनेशनल डेस्क: जब वैश्विक नेता, कॉर्पोरेट अधिकारी और शिक्षाविद मार्च के अंत में हैनान प्रांत के बोआओ के उष्णकटिबंधीय समुद्र तट पर पहुंचेंगे, तो उन्हें एक ऐसा परिदृश्य मिलेगा जिसे शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से सावधानीपूर्वक नया रूप दिया गया है। हैनान द्वीप के सफेद रेतीले समुद्र तटों को खूबसूरती से संवारा गया है; छंटे हुए ताड़ के पेड़ हल्की हवा में झूम रहे हैं।
24 से 27 मार्च 2026 तक चीन के हैनान प्रांत के बोआओ में आयोजित होने जा रही बोआओ फोरम फॉर एशिया 2026 की वार्षिक बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब पूरी दुनिया आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। एक ओर बहुपक्षवाद पर दबाव बढ़ा है, दूसरी ओर वैश्वीकरण को लेकर संदेह और संरक्षणवाद की प्रवृत्ति ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में एशिया की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि बोआओ फोरम फॉर एशिया 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि साझा विकास, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर विमर्श का एक प्रभावशाली मंच बनकर उभर रहा है।
आज विश्व अर्थव्यवस्था कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना कर रही है भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, व्यापारिक संरक्षणवाद, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, जलवायु संकट, ऊर्जा सुरक्षा, और विकासशील देशों पर बढ़ता ऋण दबाव। ऐसे माहौल में बोआओ फोरम का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यह एशिया को केवल “विकास का इंजन” नहीं, बल्कि “स्थिरता, संवाद और साझा भविष्य” के निर्माता के रूप में प्रस्तुत करता है। 2025 के बोआओ सम्मेलन में भी यह संदेश प्रमुखता से उभरा था कि अस्थिर और अनिश्चित विश्व में एशिया को सहयोग, संवाद और साझी समृद्धि का रास्ता मजबूत करना होगा।
इस वर्ष के बोआओ फोरम 2026 से सबसे बड़ी अपेक्षा यह है कि यह “खुले क्षेत्रवाद” को नया वैचारिक और नीतिगत बल देगा। खुले क्षेत्रवाद का अर्थ केवल क्षेत्रीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा सहयोग जो बाहरी दुनिया के लिए भी खुला हो, समावेशी हो, और प्रतिस्पर्धा के बजाय सहभागिता पर आधारित हो। यही सोच एशिया-प्रशांत साझेदारी को मजबूत कर सकती है। जब कुछ शक्तियां आर्थिक विभाजन, तकनीकी अवरोध और राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती दिखाई देती हैं, तब बोआओ फोरम एशियाई देशों को यह याद दिलाता है कि विकास का सबसे टिकाऊ रास्ता संपर्क, व्यापार, निवेश और नीति-समन्वय से होकर जाता है।
2026 का फोरम वैश्विक व्यापार परिवर्तनों, टैरिफ युद्धों और साझा आर्थिक सुरक्षा पर केंद्रित है। प्रमुख सत्रों में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) की क्षमता का उपयोग, APEC का पुनरुद्धार, नई ऊर्जा सहयोग, क्रॉस-बॉर्डर भुगतान प्रणालियां और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं। डिजिटल तकनीक से औद्योगिक उन्नयन, मानवरूपी रोबोटिक्स, हरित संक्रमण, AI-सक्षम स्वास्थ्य सेवा, नीली अर्थव्यवस्था और स्मार्ट शहर जैसे विषयों पर पैनल चर्चाएं होंगी। ये चर्चाएं एशिया को वैश्विक विकास का इंजन बनाने पर जोर देंगी। फोरम क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को गहरा करने और विकास की गतिशीलता को अनलॉक करने पर समर्पित है। यह एशियाई देशों को वैश्वीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग मजबूत करने का मंच प्रदान करता है। RCEP जैसे समझौतों के माध्यम से व्यापार बाधाओं को कम करना और वैश्विक दक्षिण की भूमिका बढ़ाना मुख्य लक्ष्य हैं।
बोआओ फोरम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सरकारों का मंच नहीं है। यहां नीति-निर्माता, उद्यमी, विद्वान, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और युवा विचारक एक साथ आते हैं। इसलिए यहां होने वाला विमर्श अधिक बहुआयामी और व्यावहारिक होता है। यह मंच एशिया की विकास-कथा को केवल सांख्यिकीय उपलब्धियों में नहीं, बल्कि साझी नीतियों, नए संस्थागत विश्वास और क्षेत्रीय सहयोग के ठोस विचारों में बदलने की क्षमता रखता है।
वैश्विक स्तर पर देखें तो बोआओ फोरम उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो एशिया के बाहर हैं। कारण साफ है आज वैश्विक विकास, विनिर्माण, डिजिटल नवाचार, हरित परिवर्तन और उपभोक्ता बाजार के केंद्र के रूप में एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसलिए एशिया की स्थिरता अब केवल एशिया की जरूरत नहीं, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था की भी शर्त बन चुकी है। बोआओ फोरम इस संदेश को संस्थागत रूप देता है कि एशिया का विकास बंद दरवाजों के पीछे नहीं, बल्कि खुली साझेदारी, पारस्परिक सम्मान और वैश्विक सहयोग के साथ आगे बढ़ेगा।
आज जब दुनिया को संघर्ष से अधिक सहयोग, विभाजन से अधिक एकता और अनिश्चितता से अधिक स्थिरता की आवश्यकता है, तब बोआओ फोरम फॉर एशिया 2026 एक आशावादी और रचनात्मक पहल के रूप में सामने आता है। यह फोरम न केवल एशिया की बदलती शक्ति और जिम्मेदारी को रेखांकित करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि क्षेत्रीय साझेदारी, हरित विकास, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय संवाद के जरिए विश्व को अधिक संतुलित और समृद्ध दिशा दी जा सकती है।
निस्संदेह, बोआओ फोरम 2026 की सफलता इस बात में होगी कि वह एशिया और दुनिया को यह भरोसा दिलाए कि साझी चुनौतियों का समाधान अलगाव में नहीं, बल्कि सहयोग, खुलेपन और साझा विकास की भावना में निहित है। यही इस फोरम की प्रासंगिकता है, यही इसकी शक्ति है, और यही इसकी सबसे बड़ी वैश्विक भूमिका भी है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)