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ब्राज़ील की सड़कों पर बिछीं लाशें, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

इंटरनेशनल डेस्क: ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो में स्थानीय पुलिस ने रेड कमांड नामक ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ छापेमारी की। मंगलवार सुबह लगभग 2,500 पुलिसकर्मियों ने हेलिकॉप्टरों और ग्राउंड टीमों के साथ एक ही समय में कई इलाकों में अभियान चलाया। सरकारी और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस ऑपरेशन के दौरान अब तक 130 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें 4 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और मानवाधिकार समूहों में गहरी चिंता और आक्रोश है।

पुलिस का बयान

पुलिस का कहना है कि जैसे ही उनकी टीमें लक्षित इलाकों में घुसीं, रेड कमांड के सदस्यों ने गोलीबारी शुरू कर दी। दोषी समूहों ने सड़कों पर आग लगाकर बैरिकेड बनाए और कथित तौर पर ड्रोन का भी उपयोग कर हमले किए, जिससे सुरक्षा बलों को दबाव का सामना करना पड़ा। विभिन्न जगहों पर मिले दृश्य और शवों की स्थिति ने यह दिखाया कि लड़ाई बहुत ही हिंसक रही। कुछ जगहों पर लोगों ने सड़कों पर मृतकों को रखकर विरोध किया और मृतकों की गिनती में तेज़ी से बढ़ोतरी ने माहौल और भी तनावपूर्ण बना दिया।

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सड़कों पर विरोध प्रदर्शन

स्थानीय निवासियों ने पुलिस की कार्रवाई को अत्यधिक कड़ा और अमानवीय बताया है। कई लोगों ने इसे ‘नरसंहार’ कहा और कई समुदायों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल और पुलिस से इस्तीफे की मांगें भी उठाई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक रूप से शव रखकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।
एक स्थानीय कार्यकर्ता ने मीडिया से कहा कि हमें क्या मौत की सजा मिल रही है? हमें मारना बंद करो।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए राज्य सरकार और पुलिस से ऑपरेशन की विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एलेक्जेंडर डी मोरेस ने राज्यपाल और पुलिस उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी देने का आदेश दिया और रियो में संबंधित वरिष्ठों के साथ सुनवाई तय की है। कोर्ट ने मृतकों की संख्या, शवों की स्थिति और घटनास्थल पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं पर स्पष्ट जवाब मांगे हैं।

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस घटना पर गहरी चिंता जता रहे हैं और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें बिना पारदर्शी जांच के अनिश्चितताओं और असमंजस को जन्म देंगी।

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पुलिस का पक्ष

पुलिस का दावा है कि यह अभियान नार्को-आतंकवाद और हथियारबंद अपराधियों के खिलाफ था। पुलिस बताती है कि रेड कमांड बड़े पैमाने पर हथियारों से लैस था और उन्होंने कई इलाकों पर कब्जा कर रखा था। रेड कमांड कुछ इलाकों में दूसरे गुटों जैसे कि थर्ड प्योर कमांड (TCP) के क्षेत्र में भी आक्रमण कर रहा था, जिसके कारण हिंसा बढ़ रही थी। इसलिए सुरक्षा बलों ने Complexo do Alemão और Complexo da Penha जैसे परिसरों को निशाना बनाया ताकि इन समूहों की ताकत कमजोर की जा सके। पुलिस यह भी कहती है कि अभियान के दौरान उन्हें भी गोलीबारी और बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिससे अधिक हिंसा हुई।

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