
“ब्रिक्स” के वर्तमान में 10 सदस्य देश हो चुके हैं। उधर, ब्रिक्स के विस्तार का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। सभी सदस्य देश आपसी लाभ और जीत-जीत के उद्देश्य से ब्रिक्स तंत्र में शामिल होते हैं। इसमें शामिल होने को स्थगित करने के किसी भी देश के फैसले का पूरी तरह से सम्मान भी किया जाता है। कुछ गैर-पश्चिमी देश न केवल ब्रिक्स में शामिल होने की आशा रखते हैं,
बल्कि एससीओ में भी शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिक्स और एससीओ दोनों अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव के तहत उभरे हैं। बहुत से विकासमान देश गैर-पश्चिमी सहकारी संगठन, जो व्यापक अंतर्राष्ट्रीय हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं, के उद्भव को देखना चाहते हैं। विस्तार के बाद अब ब्रिक्स देशों के दुनिया में सबसे व्यापक और सबसे बड़ी औद्योगिक श्रृंखला बनी हुई हैं।
ब्रिक्स देशों की जीडीपी दुनिया का एक तिहाई है, जो जी 7 देशों से अधिक है। 2021 में, ब्रिक्स देशों का क्षेत्रफल विश्व का 26.46%, जनसंख्या 41.93%, जीडीपी 25.24% और कुल व्यापार मात्रा विश्व का 17.9% हिस्सा रहा था। विस्तार पूरा होने के बाद अब ब्रिक्स सदस्यों की जीडीपी 28.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी,
जो विश्व का 28% है। 10 ब्रिक्स सदस्य देशों की जनसंख्या विश्व की 45% रहती है। और इन देशों का कुल माल व्यापार विश्व का 21% रहता है। G7 जैसे पश्चिमी क्लबों से अलग, ब्रिक्स देश व्यापक देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भविष्य में, ब्रिक्स देश अधिक न्यायसंगत वैश्विक औद्योगिक सहयोग तंत्र, विविध ऊर्जा प्रणाली और मौद्रिक प्रणाली की स्थापना को बढ़ावा देने में समान प्रयास करेंगे।
हाल के वर्षों में, आधिपत्यवाद की गिरावट के साथ, पुरानी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बदलने की मांग करने वाले विकासशील देशों की आवाज़ तेज़ हो गई है। जैसे-जैसे दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है, ब्रिक्स देश व्यापक विकासशील देशों की ओर से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)