एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकास की क्षमता को बढ़ावा देना बिना क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के संभव नहीं है। हाल ही में संपन्न अपेक चाइना बिजनेस लीडर्स फोरम की बैठक में दुनियाभर के बिजनेस लीडरों के विचार कुछ ऐसे ही थे। वैसे बदलती वैश्विक व्यवस्था में जिस तरह एक तरफा दबाव बढ़ रहे हैं, उसमें यह विचार ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। ट्रेड युद्ध और एकतरफा कार्रवाई के चलते दुनिया के ताकतवर देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं और कंपनियों को संरक्षण पर जोर दे रहे हैं। ऐसा होना अस्वाभाविक भी नहीं है। लेकिन इसकी वजय से वैश्विक कारोबार और निवेश के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं।
पेइचिंग में APEC चीन CEO फोरम 2026 में अधिकांश देशों के बिजनेस लीडर का यही माना था कि अपेक यानी एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन के सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को खुले सहयोग और क्षेत्रीय सहयोग के लिए काम करना होगा, तभी इस चुनौती से निबटा जा सकेगा। इस बैठक के दौरान ठीक ही, आपसी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स और डिजिटल इनोवेशन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनती दिखी। वैसे भी कारोबार के लिए यही जरूरी भी है, इससे ही सप्लाई चेन यानी आपूर्ति श्रृंखला मजबत होगी और पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के आपकी कारोबार को ना सिर्फ बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उन्हें नए अवसर भी मिलेंगे।
इस बैठक के नतीजों की जानकारी देते हुए अपेक के सिंगापुर स्थित सचिवालय के कार्यकारी निदेशक एडुआर्डो पेड्रोसा ने कहा कि अपेक अर्थव्यवस्थाओं ने विकासकी रफ़्तार को फिर से हासिल करने और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाने की तैयारी की है। चीन की भी सोच कुछ ऐसी ही है, जिसका इजहार चीन काउंसिल फॉर द प्रमोशन ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड के चेयरमैन रेन होंगबिन ने किया। उनका यह कहना कि अपेक अर्थव्यवस्थाएं आपसी हित के और क्षेत्रों की पहचान करें और औद्योगिक व सप्लाई चेन में खुले सहयोग को मज़बूत करें, इस दिशा में सकारात्मक प्रयास ही कहा जाएगा। क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मज़बूत बनाने की अपनी विशेष अहमियत है।
चीन की इस बात को अपेक में गंभीरता से सुना जाना लाजिमी है, क्योंकि साल 2025 में चीन तेरह अपेक देशों की अर्थव्यवस्थाओं का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। चीन का इन देशों के साथ साल 2025 में कुल कारोबार 3.7 खरब डालर तक पहुँच गया। यह कारोबार कितना बड़ा है, इसे चीन के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से समझा जा सकता है। इसके अनुसार, यह कारोबार चीन के कुल विदेशी व्यापार का 57.8 प्रतिशत है। इस बीच यह भी जान लेना जरूरी है कि चीन ने 31 देशों और अर्थव्यवस्थाओं के साथ 24 फ्री ट्रेड समझौते या आर्थिक और व्यापारिक सौदे किए हैं। इनमें 15 अपेक अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं। हाल के वर्षों में, चीन ने सिंगापुर और पेरू जैसी अपेक अर्थव्यवस्थाओं के साथ फ्री ट्रेड समझौतों को अपग्रेड भी किया है।
इस बैठक में ग्लोबल ट्रेडिंग व्यवस्था के सामने आ रही बड़ी चुनौतियों की भी चर्चा हुई। चीन ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्शन के साधनों के क्रॉस-बॉर्डर फ्लो जैसे अहम क्षेत्रों के लिए अपने दरवाज़े खोलना जारी रखेगा। इसके साथ ही, चीन डिजिटल, इंटेलिजेंट और ग्रीन टेक्नोलॉजी में तेज़ी से हो रही तरक्की, इन्वेस्टमेंट और ग्रोथ के मौके तलाश रही ग्लोबल कंपनियों का स्वागत करता रहेगा।
इस बैठक में फ्रांसीसी मल्टी-स्पोर्ट्स ब्रांड डेकाथलॉन के भी अधिकारी भी शामिल रहे। उसके चीन में वाइस-प्रेसिडेंट एलोडी लाटूर ने भी ऐसी ही बात कही। उन्होंने कहा कि चीन का व्यापक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और पूरी वैल्यू चेन कंपनियों को तेज़ी से मार्केट में प्रोडक्ट्स लाने में मदद करती है, जिससे मिलने वाले फायदे कहीं और नहीं मिलते। साफ है कि अपेक देशो के लिए चीन ने जहां अपने दरवाजे खोलने जारी रखे हैं, वहीं उनका बड़ा कारोबारी सहयोगी बना हुआ है। यही वजह है कि अपेक बिजनेस लीडर्स फोरम में चीन की आर्थिकी की खुलकर प्रशंसा हुई और उसके साथ कारोबार भरोसा जताया गया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- उमेश चतुर्वेदी)

