इंटरनेशनल डेस्क। सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी समझ इस बदलते और अस्थिर दौर में क्या भूमिका निभा सकते हैं? वैश्विक सभ्यता संवाद मंत्रिस्तरीय बैठक के अवसर पर, चीन की प्रमुख मीडिया चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के अधीनस्थ CGTN और रनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना ने 41 देशों के 12,302 उत्तरदाताओं के बीच एक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि अधिकांश लोग सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख को मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने और विश्व शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए एक अहम तत्व मानते हैं। लोग मानव आधुनिकीकरण में सांस्कृतिक धरोहर और नवाचार की भूमिका को सकारात्मक रूप से मूल्यांकित करते हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित वैश्विक सभ्यता पहल अब वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक व्यापक सहमति बन चुका है।
सहमतियों से कार्रवाई तक: वैश्विक सभ्यता पहल को मिली वैश्विक सराहना
चीन द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दी गई एक और बड़ी सार्वजनिक सेवा, वैश्विक सभ्यता पहल को वैश्विक स्तर पर काफी सराहना मिली है। इसके मुख्य विचार वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए चीन का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। इस सर्वे में 90.8% उत्तरदाता मानते हैं कि सभ्यताओं की विविधता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मूल सिद्धांत है। 90.2% का मानना है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान सभी देशों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है, क्योंकि कोई भी देश इससे अछूता नहीं रह सकता। 88.5% का कहना है कि सांस्कृतिक नवाचार और संरक्षण दोनों महत्वपूर्ण हैं, और 89.4% का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ सके।
सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि लोग यह मानते हैं कि देशों को अपनी विकास की राह और सांस्कृतिक विविधताओं का निर्धारण स्वतंत्र रूप से करना चाहिए। 88.8% का मानना है कि सभी देशों को अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार अपनी विकास की दिशा और सामाजिक प्रणालियाँ निर्धारित करने का अधिकार है। इस सर्वेक्षण में शामिल 41 देशों में सबसे अधिक समर्थन करने वाले दस देश ग्लोबल साउथ के सदस्य हैं।
संरक्षण से नवाचार की ओर: चीनी आधुनिकीकरण ने आधुनिकीकरण की समझ को समृद्ध किया
मानव समाज के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान और आपसी सीख का निरंतर अहम योगदान रहा है। सर्वेक्षण में 89.8% उत्तरदाता मानते हैं कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच आदान-प्रदान मानवता की साझा प्रगति को बढ़ावा देता है। 85.9% का मानना है कि देशों में आधुनिकीकरण की प्रैक्टिस से मानव सभ्यताओं की विविधता समृद्ध होती है। 89.4% का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय लोगों के बीच आदान-प्रदान से सभी देशों के लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ती है।
इधर के सालों में, चीनी आधुनिकीकरण की सफल प्रैक्टिस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आधुनिकीकरण की समझ को और समृद्ध किया है। सर्वेक्षण में 83.4% का कहना है कि प्रत्येक देश का आधुनिकीकरण उसकी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा होना चाहिए। 87.1% का मानना है कि आधुनिकीकरण का मतलब परंपराओं को छोड़ना नहीं है, बल्कि उन्हें नवाचार के जरिए पुनर्जीवित करना है, और 88.5% इसे महत्वपूर्ण मानते हैं कि सांस्कृतिक नवाचार और पारंपरिक संरक्षण समान रूप से जरूरी हैं।
मीडिया से लेकर प्रौद्योगिकी तक: चीनी संस्कृति का नवाचार एक विशिष्ट विशेषता
चीनी संस्कृति की विशेषताओं के मूल्यांकन में, 60.6% उत्तरदाता नवाचार को सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मानते हैं। इनमें से 77.2% का मानना है कि चीनी तकनीकी नवाचार और इसके अनुप्रयोग प्रमुख रूप से महत्वपूर्ण हैं। सर्वेक्षण से यह भी पता चलता है कि 81.6% का मानना है कि चीन का वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव और सॉफ़्ट पावर तेजी से बढ़ रहे हैं। 75.4% यह मानते हैं कि चीनी सभ्यता का वैश्विक सभ्यताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
बता दें कि यह सर्वेक्षण CGTN और रनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना द्वारा किया गया था और इसमें 12,302 उत्तरदाता शामिल थे। इसने ऑनलाइन पैनल सर्वेक्षण विधि का उपयोग किया, जिसमें प्रत्येक देश के जनगणना-आधारित आयु और लिंग वितरण को ध्यान में रखा गया था। सर्वेक्षण में विकासशील देशों और विकसित देशों दोनों को शामिल किया गया था।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
मेष: दिन शुभ रहेगा...